वेंकैया नायडू ने कृषि भूमि की घटती उपजाऊ क्षमता पर जताई चिंता

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने किसानों को कृषि विविधीकरण और परंपरागत भारतीय तकनीक के संबंध में जागरूक करने पर बल देते हुए शनिवार को कहा कि पशुपालन , मछली पालन, और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने किसानों को कृषि विविधीकरण और परंपरागत भारतीय तकनीक के संबंध में जागरूक करने पर बल देते हुए शनिवार को कहा कि पशुपालन , मछली पालन, और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने यहां आचार्य एन जी रंगा की 120 वीं जयंती समारोह ऑनलाइनसंबोधित करते हुए कहा कि फसल विविधीकरण के संबंध में किसानों को जागरूक कर उनकी आय में इजाफा किया जा सकता है।

मछली पालन , पशुपालन, कीट पालन और खाद्य प्रसंस्करण से वृद्धि

मछली पालन , पशुपालन, कीट पालन और खाद्य प्रसंस्करण आदि से किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है। यह सभी कृषि का ही अंग है। किसानों को खेती से इतर कृषि से जुड़े कार्यों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इससे किसानों की आय के नए स्रोत खुलेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को दलहन और तिलहन की खेती करने के अलावा नगदी फसलों के लिए भी प्रेरित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कृषि भूमि की घटती उपजाऊ क्षमता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को भारतीय कृषि की परंपरागत तकनीक से अवगत कराने की जरूरत है। कृषि भूमि उपजाऊ बनाने के लिए रसायनों का इस्तेमाल कम से कम किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालयों की प्रयोगशाला में हो रहे प्रयोगों का लाभ किसानों तक पहुंचाने की अपील करते हुए कहा कि उनके प्रयासों का लाभ कृषि क्षेत्र को मिलना ही चाहिए।

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उपराष्ट्रपति ने टिकाऊ और सतत कृषि के लिए बहुआयामी प्रयासों पर बल देते हुए कहा कि इससे कम से कम भूमि पर अधिक से अधिक उपज ली जा सकेगी। उन्होंने आधुनिक तकनीक और परंपरागत कृषि ज्ञान के बीच सामंजस्य स्थापित करने पर जोर देते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल की जा रही तकनीकों को बड़े स्तर पर प्रयोग करने की जरूरत है। इससे स्थानीय समस्याओं को बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से बचने के लिए विशेष बीजों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव समझने के लिए काम करना चाहिए।

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