बीजेपी के इस दिग्गज ने खोल दी पोल, विपक्ष को बताया 2019 में मोदी सरकार हराने का तरीका

नई दिल्ली: केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भले ही अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में जीत को लेकर बड़े बड़े दावे कर रहे हों। लेकिन असल में बीजेपी को इन दिनों अपनी ही पार्टी के पुराने दिग्गजों के हमलों का सामना करना पड़ रहा है। इसी क्रम में बीजेपी के खिलाफ बगावती तेवर अपना चुके यशवंत सिन्हा ने विपक्षी पार्टियों को अपनी ही पार्टी को हराने का तरीका बताया है।

मिली जानकारी के अनुसार, यशवंत सिन्हा ने एक न्यूज चैनल को लिखे आलेख में बताया कि अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में अगर विपक्ष मोदी सरकार को सत्ता से दूर करना चाहते हैं तो सभी को एकजुट होकर चुनाव लड़े। उन्होंने अपने इस लेख में लिखा कि अभी भी मोदी को हराने की रणनीति बनाने में विपक्षी नेता बहुत पीछे हैं और रोज समय गंवा रहे हैं।

उन्होंने लिखा है कि विपक्षी दलों के अलग-अलग नेताओं द्वारा आने वाले बयान उनके अंदर उलझनें पैदा कर रहा है। पूर्व मंत्री ने लिखा है कि विपक्षी दलों द्वारा मौजूदा समय में तीन तरह के विकल्प की बात की जा रही है। विपक्ष के कुछ नेताओं का कहना है कि चुनाव पूर्व कोई गठबंधन नहीं हो सकता है। जो भी गठबंधन होना है वो चुनाव बाद होगा। दूसरे विकल्प के तौर पर सभी क्षेत्रीय दल गैर भाजपाई, गैर कांग्रेसी मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ें और तीसरा विकल्प है कि कांग्रेस की अगुवाई में देशभर में एक महागठबंधन बने और साझा रूप से पीएम मोदी और एनडीए के खिलाफ लड़ाई लड़ी जाय।

सिन्हा ने लिखा है कि कांग्रेस के साथ मिलकर एक महागठबंधन बनाकर मोदी के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है। उन्होंने लिखा है कि इस गठबंधन के लिए यह जरूरी है कि वो बिना किसी नाम की चर्चा किए सिर्फ बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के बड़े इरादे से राजनीतिक लड़ाई लड़े। हालांकि, सिन्हा ने चेताया है कि ऐसी सूरत में मोदी-शाह की टीम अक्सर पूछेगी कि इधर तो मोदी है उधर कौन?

सिन्हा ने लिखा है कि विपक्षी दलों को बीजेपी के इस जाल में नहीं फंसना चाहिए क्योंकि इस चुनाव में मोदी मुद्दा नहीं हैं बल्कि वो सारे मुद्दे अब मुद्दा बन गए हैं जिनके बल पर 2014 में मोदी ने सत्ता पाई थी। यशवंत सिन्हा ने लिखा है कि विपक्षी मोर्चे के पास मोदी से निपटने के लिए निश्चित तौर पर एक प्रभावी और लोकलुभावन एजेंडा होना चाहिए क्योंकि वे वैकल्पिक नेता के सहारे नहीं बल्कि वैकल्पिक एजेंडे के सहारे ही उन्हें हरा सकते हैं।

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