अवैध गिरफ्तारी पर पीड़ित को मिलेगा 25,000 मुआवजा, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई

उच्च न्यायालय (High Court) द्वारा एक जनहित में पारित महत्त्वपूर्ण आदेश के आधार पर किसी व्यक्ति को अवैध तरीके से गिरफ्तार कर निरुद्धि में रखने पर पीड़ित को सरकार 25,000 रूपए मुआवजा देगी

नई दिल्ली: उच्च न्यायालय (High Court) द्वारा एक जनहित में पारित महत्त्वपूर्ण आदेश के आधार पर किसी व्यक्ति को अवैध तरीके से गिरफ्तार कर निरुद्धि में रखने पर पीड़ित को सरकार 25,000 रूपए मुआवजा देगी। इसके साथ ही अवैध रूप से निरुद्ध करने वाले अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच कर कार्रवाई भी की जाएगी। उच्च न्यायालय  ने 23 मार्च 2021 से लागू इस नई नीति का सख्ती से पालन करने का मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव गृह को निर्देश भी दिया है।

जानिए पूरा मामला

दहअसल उच्च न्यायालय द्वारा एक जनहित में पारित महत्त्वपूर्ण निर्णय एवं आदेश के अनुपालन में उल्लेखित शासनादेश के क्रम में अब स्थानीय पुलिस थाना या अन्य अधिकारी किसी नागरिक को अवैध और मनमाने तरीके से थाने मे निरुद्ध करते है अथवा दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 ,107,116 में मनमाने तरीके या नियमों के विरुद्ध चालान करते हैं जिसमें मजिस्ट्रेट भी शामिल है तो वह पुलिस अथवा संबंधित मजिस्ट्रेट के विरूद्ध सरकार अनुशासनात्मक विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ रुपए 25000 मुआवजा वसूलेगी।

उच्च न्यायालय (High Court) ने कहा है कि इस नीति को प्रदेश के सभी ब्लाकों, तहसील मुख्यालयों, जिला कलेक्ट्रेट और पुलिस थानों में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए। इस नीति को डिस्प्ले बोर्ड पर भी लगाया जाए और अखबारों में प्रकाशित किया जाए। ताकि आम लोगों को इसकी नई नीति के बारे में जानकारी मालूम हो सके।

कोर्ट ने बोला कि किसी भी आम व्यक्ति को अवैध तरीके से अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न किया जाना न केवल उस व्यक्ति के आत्मसम्मान को क्षति पहुंचती है बल्कि उसके मानसिक दशा को भी चोट पहुंचती है। ऐसे स्थिति में पीड़ित को मुआवजा दिलाना समाजिक बुराई को Discouraged करना भी है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित को मुआवजा पाने का अधिकार है।

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