विधानसभा में मिला पाउडर विस्फोटक नहीं था

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लखनऊ। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश विधानसभा में बरामद किया गया संदिग्ध पदार्थ विस्फोटक नहीं था। इस बात का खुलासा सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरैट्री की जांच में हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरैट्री ने इसकी रिपोर्ट एटीएस को दे दी है।

सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा में जो पाउडर मिला था क्वार्ट्ज के क्रिस्टल था और इसका उपयोग लकड़ी, कांच में पॉलिश के लिए किया जाता है। इससे पहले एफएसएल के निदेशक एसबी उपाध्याय ने बिना पुष्टि के ही क्वार्ट्ज को पीईटीएन बता दिया था।

वहीं इस मामले में जल्दबाजी दिखाते हुए इसे विस्फोटक बताने के आरोप में डीजीपी मुख्यालय ने एसबी उपाध्याय के खिलाफ कार्रवाई के लिए गृह विभाग से सिफारिश कर दी है। इस मामले में एसबी उपाध्याय बढ़ती नजर आरहीं हैं। उनके खिलाफ बिहार में करोड़ों के गबन का भी आरोप है। बिहार सरकार उन्हें वापस भेजने की मांग भी की है। इससे पहले बुधवार को एनआईए की टीम ने भी उपाध्याय से इस मामले में पूछताछ की। टीम ने उनसे पूछा की इतनी जल्दी उन्हें कैसे पता चल गया कि संदिग्ध पाउडर विस्फोटक है। कई सवालों का जवाब अभी उपाध्याय देना है।

आपको बता दें कि गत 12 जुलाई को विधानसभा भवन में सपा विधायक के सीट के नीचे विस्फोटक मिला था। 14 जुलाई को की गई शुरुआती जांच के बाद संदिग्ध पाउडर में PETN विस्फोटक मिलने की पुष्टि की थी। जाँच में विस्फोटक की पुष्टि होने के बाद सीएम योगी ने विधानसभा में इसे साजिश बताया था। जिसके बाद NIA और यूपी ATS मिलकर इस मामले की छानबीन कर रहें हैं।

इस मामले में विधानसभा में काम करने वाले कर्मचारियों से लेकर विधायकों मंत्रियों तक से पूछताछ की गई। सपा के विधायकों से भी पूछताछ की गई। यूपी विधानसभा में समाजवादी पार्टी के एमएलए मनोज पांडे की सीट के नीचे से ही पेंटेरीथ्रिटोल टेट्रानेरेट्रेट (पीईटीएन) विस्फोटक मिला था लेकिन बीस मिनट तक हुई पूछताछ में पांडे ने बताया कि उनहोंने कोई संदिग्ध चीज़ अपने आसपास नहीं देखी। इसके अलावा कन्नौज से ही समाजवादी पार्टी के विधायक अनिल दोहरे से भी एटीएस ने फोन पर ही पूछताछ की है। वे 12 जुलाई मनोज पांडे के बगल वाली सीट पर विधानसभा मे बैठे थे।

 

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