चंद्रयान-2 से अलग हुआ विक्रम, रूस ने मना किया तो इसरो ने खुद बना लिया लैंडर

चंद्रयान -2 मिशन के तहत आज ऑर्बिटर से विक्रम लैंडर सफलतापूर्वक अलग हो गया. इसके बाद करीब 20 घंटे तक विक्रम लैंडर अपने पिता यानी ऑर्बिटर के पीछे-पीछे 2 किमी प्रति सेकंड की गति से ही चक्कर लगाता रहेगा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिक के लिए यह बड़ी सफलता है और अब उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रज्ञान रोवर की चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कराना है.

बता दें कि जो विक्रम लैंडर आज सफलतापूर्वक चंद्रयान से अलग हुआ है उसका नाम  इसरो के संस्थापक और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है. इसकी शुरुआती डिजाइन इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद ने बनाया था. बाद में इसे बेंगलुरु के यूआरएससी ने विकसित किया. इसमें 4 पेलोड हैं. यह 15 दिनों तक वैज्ञानिक प्रयोग करेगा.

बता दें कि भारत ने जब चंद्रयान मिशन के लिए रूस से लैंडर की मांग की थी तो उसने देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद भारतीय वैज्ञानिकों ने अथक मेहनत की और उन्होंने स्वदेशी लैंडर विकसित कर लिया जिसका नाम विक्रम दिया गया.

7 सितंबर का दिन चंद्रयान मिशन 2 के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि उसी दिन विक्रम लैंडर चांद पर उतरेगा. 6 और 7 सितंबर की दरम्यानी रात  1:30 से 1.40 बजे रात तक विक्रम लैंडर 35 किमी की ऊंचाई से चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरना शुरू करेगा. तब इसकी गति होगी 200 मीटर प्रति सेकंड. यह इसरो वैज्ञानिकों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण काम होगा.

उसी दिन 1:55 बजे रात में विक्रम लैंडर दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद दो क्रेटर मैंजिनस-सी और सिंपेलियस-एन के बीच मौजूद मैदान में उतरेगा. करीब 6 किमी की ऊंचाई से लैंडर 2 मीटर प्रति सेकंड की गति से चांद की सतह पर उतरेगा. ये 15 मिनट बेहद तनावपूर्ण होंगे. 3.55 बजे रात – लैंडिंग के करीब 2 घंटे के बाद विक्रम लैंडर का रैंप खुलेगा. इसी के जरिए 6 पहियों वाला प्रज्ञान रोवर चांद की सतह पर उतरेगा.

5.05 बजे सुबह  प्रज्ञान रोवर का सोलर पैनल खुलेगा. इसी सोलर पैनल के जरिए वह ऊर्जा हासिल करेगा. इसके बाद सुबह 5.10 बजे  प्रज्ञान रोवर चांद की सतह पर चलना शुरू करेगा. वह एक सेंटीमीटर प्रति सेकंड की गति से चांद की सतह पर 14 दिनों तक यात्रा करेगा. इस दौरान वह 500 मीटर की दूरी तय करेगा.

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