दो धड़ों में बंटे दिख रहे वोटर्स ! जानिए आखिर किस ओर बह रही UP में चुनावी हवा ?

UP चुनाव के पास आते ही नेताओं ने शब्दों के बाण चलाने शुरु कर दिए है. ऐसे में वोटरों को दो धड़ों में बंटते दिख रहे है

लखनऊ. विधानसभा चुनाव से पहले UP का सियासी माहौल गरम हो गया है. इस रण को जीतने के लिए शब्‍दबाणों की बौछार तेज हो गई है. बात असल मुद्दों की नहीं, बल्कि टोपी, लुंगी और भगवा की हो रही है. पक्ष और विपक्ष के नेता एक-दूसरे को जुमलों से लहूलुहान करने में जुट गए हैं. यूपी की राजनीति में यह नया नहीं है. चुनाव में यहां मुद्दों से ज्‍यादा किन्‍हीं खास वर्ग को खुश करने या उन्‍हें टारगेट करने पर जोर रहता है. यह पार्टियों की सोची-समझी रणनीति का हिस्‍सा होता है. बता दें UP में फिर झंडा गाड़ने के लिए एक ओर जहां भाजपा पूरी तैयारी में है तो वहीं सपा उसकी राह में अड़ंगे डाल दोबारा सिंहासन हासिल करना चाहती है. यूपी चुनाव का काउंटडाउन शुरू होने के साथ दोनों ही पार्टियां बेहद आक्रामक होती जा रही हैं. भाषा की मर्यादा तोड़ी जा रही है

लाल टोपी वाले खतरे की घंटी हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश में मुख्य विपक्षी सपा पर करारा हमला किया. पीएम ने आरोप लगाया कि अपनी तिजोरी भरने और आतंकवादियों पर मेहरबानी दिखाने के लिए सपा सत्ता चाहती है. ये लाल टोपी वाले लोग प्रदेश के लिए ‘खतरे की घंटी’ यानी रेड अलर्ट हैं. दरअसल, लाल टोपी समाजवादी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की पहचान है. वही इसे लगाते हैं.

बीजेपी के बयान पर अखिलेश का पलटवार

उधर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पर पलटवार किया। उन्‍होंने कहा कि यही लाल टोपी भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी। अखिलेश ने ट्वीट कर कहा, “भाजपा के लिए ‘रेड एलर्ट’ है महंगाई का, बेरोजगारी-बेकारी का, किसान-मजदूर की बदहाली का, हाथरस, लखीमपुर, महिला व युवा उत्पीड़न का, बर्बाद शिक्षा, व्यापार व स्वास्थ्य का और ‘लाल टोपी’ का क्योंकि वो ही इस बार भाजपा को सत्ता से बाहर करेगी।” मेरठ में एक चुनावी रैली में भाजपा को चुनौती देते हुए अखिलेश बोले – ‘जो पैदा करे खाई वही है भाजपाई।’

एकमुश्‍त वोट की काटी जा रही खेती 

चुनाव पास आते ही यूपी में ऐसी बयानबाजी बढ़ जाती है. इससे समीकरण बनते-बिगड़ते हैं. जिन्‍ना का जिन्‍न इसी समय निकलता है. टोपी, लुंगी और भगवा दिखने लगते हैं। इसका मकसद सिर्फ एक होता है. ध्रुवीकरण यानी पोलराइजेशन. यह ध्रुवीकरण सत्‍ता तक पहुंचाता है और उससे हटाता भी है. वहीं ज्‍यादा पोलराइजेशन से ओबीसी सहित अन्‍य हिंदू और दूसरे धर्म के वोटरों का रुख बीजेपी की ओर हो जाता है. हर किसी ने चुनाव में इसके जरिये एकमुश्‍त वोट की खेती काटी है. ऐसे में चुनाव तक पहुंचते-पहुंचते यह तल्‍ख बयानबाजी थमने वाली नहीं है.

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