खत्म हुई वार मेमोरियल की जंग, तय हुई जमीन

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देहरादून। वार मेमोरियल को लेकर बीते कई महीनों से चल रही जंग समाप्त हो गयी है। राज्य के वार मेमोरियल के लिए रक्षा मंत्रालय ने चीड़ बाग में सेना की एक एकड़ भूमि छावनी परिषद गढ़ी को दिए जाने के आदेश जारी कर दिये हैं। इसके साथ ही चीड़ बाग म्यूजिकल पार्क में चिह्नित भूमि पर राज्य का पहला स्टेट वॉर मेमोरियल बनने का रास्ता भी साफ हो गया। उम्मीद की जा रही है कि जनवरी के अंत तक रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर इसके शिलान्यास के लिए दून आ सकते हैं।

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हालांकि छावनी परिषद ने वार मेमोरियल निर्माण के लिए छह एकड़ भूमि का प्रस्ताव मध्य कमान को भेजा था। लेकिन रक्षा मंत्रालय ने सभी पहलुओं पर विचार करते हुए चीड़ बाग में वार मेमोरियल के लिये एक एकड़ भूमि को हरी झंडी दी है। संपदा विभाग के अधीन आने वाली सेना की बी 4 श्रेणी की इस भूमि को छावनी परिषद को दिए जाने के लिए रक्षा संपदा निदेशालय ने रक्षा संपदा अधिकारी मेरठ को श्रेणी बदलने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं। मेरठ कार्यालय अब जनरल लैंड रिकार्ड (जीएलआर) के साथ रक्षा भूमि साफ्टफेयर को अपडेट कर मुख्य अधिशासी अधिकारी देहरादून को भू स्वामित्व दे देगा।

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म्यूजियम समेत कई सुविधाएं होंगी

राज्य के पहले स्टेट वार मेमोरियल को यूरोप, अमेरिका के युद्ध स्मारकों की तर्ज पर ही विकसित करने की योजना है। वार मेमोरियल के साथ प्रथम विश्व युद्ध से लेकर अब तक हुए युद्धों की कहानी बयान करने वाला म्यूजियम भी बनना है। इस स्मारक पर प्रदेश के अब तक हुए शहीद सैनिकों के नाम भी अंकित होंगे। जमीन तय होने पर पूर्व सैनिकों ने खुशी जताते हुए कहा कि चीड़ बाग में वॉर मेमोरियल बनना प्रदेश के शहीद वीर सैनिकों के सम्मान के साथ ही सभी के लिये गर्व की बात है।

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