सजा ए मौत को दी गयी थी फिर भी है जिंदा

maut1

एक युवा जोड़े को क्रिसमस की सबसे बेहतरीन गिफ्ट मिली। जब उनकी मासूम बेटी मौत को मात देकर लौट आयी। ठीक पांच महीने पहले फ्रेंसका और उसके पति ली मूर विलियम ने देखा कि उनकी बेटी अंतिम सांसें ले रही है। उन्होंने उसका आखिरी फोटोग्राफ लिया और अस्पताल के सघन चिकित्सा इकाई में अपनी एक साल की बच्ची का लाइफ सपोर्ट सिस्टम वेंटिलेटर का बटन बंद कर दिया। लेकिन 30 मिनट के भीतर चमत्कार हुआ। जिस बच्ची को डाक्टरों ने मौत को सौंप दिया था  उसकी हालत में सुधार शुरू हो गया और उसने हाथ पैर चलाना और रोना शुरू कर दिया। कल ये मासूम बच्ची अपने माता पिता के साथ अपने घर पर क्रिसमस मनाएगी। जिसकी हालत में चमत्कारिक सुधार से स्वयं उसके माता पिता और डाक्टर स्तब्ध हैं। खुशी से झूम रही मिसेज मूर कहती हैं कि यह आश्चर्यजनक है। यह ठीक वैसा ही है जैसे हमारी लाटरी लग गयी हो। उसने हमारे घर को पूरा कर दिया। मै उसको स्वस्थ देखकर बहुत खुश हूं। जब वह मां कहती है तो मेरे दिल को छू लेती है।

करीब 14 महीने पहले बेला के माता पिता तब चिंतित हुए थे जब उसके बाल गिरना शुरू हुए थे। वह ठीक से बैठ भी नहीं पाती थी और गिर जाती थी। अस्पताल में डाक्टर सारी जांच के बाद भी यह जान पाने में असफल रहे थे कि ऐसा क्यों हो रहा है। डाक्टरों का विश्वास था कि उसे अस्थमा है उन्होंने बेला को इनहेलर दिया क्योंकि उसे छाती में संक्रमण भी लग रहा था। लेकिन इसके तीन महीने बाद बेला की हालत बिगड़ गयी और उसका एनर्जी लेबल गिरता गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में पता चला कि उसके पैरों में कोई जान नहीं है।

उसकी हालत बिगड़ती गयी और उसे कैम्ब्रिज के एड्डेनब्रुक्स अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। वहां जांच में उसके दिमाग में तमाम असामान्यताएं पता चलीं। उसके माता पिता से तीन बार बताया गया कि उसके बचने की कोई संभावना नहीं दिखायी दे रही है। डाक्टरों के मुताबिक बेला बायोटिनिडास की शिकार थी। यह जेनेटिक डिस्आर्डर की शिकार थी उसका कोई निदान नहीं था। सब तरफ से थकहार का दया मृत्यु देने का फैसला हुआ। लेकिन जब उसने संघर्ष शुरू कर दिया तो डाक्टरों ने वह सब किया जो वह कर सकते थे। अब वह ठीक है और कुछ दिन में स्कूल भी जाना शुरू कर देगी।

 

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button