गांव में गुजारा कर लेंगे, लेकिन अब वापस शहर नहीं आएंगे… छलका प्रवासी मजदूरों का दर्द

देश में लॉकडाउन 4.0 की शुरुआत हो चुकी है. केंद्र सरकार ने इस बार राज्यों को अधिक अधिकार देते हुए यह छूट दे दी है कि वे अपने स्तर पर नियम तय करें. उद्योग-व्यापार को पटरी पर लाने की कवायद के बीच प्रवासी मजदूरों के घर वापस लौटने का सिलसिला भी जारी है. दूर-दराज के इलाकों से लगातार आ रहे मजदूरों को सुरक्षित उनके घर भेजना सबसे बड़ी चुनौती है.

दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से चले मजदूरों के लिए ताज नगरी आगरा सबसे बड़ा ट्रांजिट प्वाइंट बन चुका है. हजारों की तादाद में फतेहपुर सीकरी मंडी और आगरा के आईएसबीटी बस टर्मिनल पर एकत्रित हो रहे हैं. इन मजदूरों की व्यथा भी झलक रही है. घर जाने के लिए निकले मजदूरों ने कहा कि गांव में गुजारा कर लेंगे, लेकिन अब वापस शहर नहीं आएंगे.

दिल्ली से ट्रक पकड़ कर आगरा तक आए बिहार के चंपारण निवासी संजय कुमार ने बताया कि यहां तक आने में 6 दिन लग गए. उन्होंने दिल्ली सरकार की ओर से खाना दिए जाने के दावों को भी नकारते हुए कहा कि थोड़ी सी खिचड़ी दी जाती थी. बिहार सरकार से भी कोई सहयोग नहीं मिला. पेंटिंग का काम करने वाले संजय ने कहा कि गांव जाकर खेती करेंगे. नमक रोटी खा लेंगे, लेकिन अब घर पर ही रहेंगे.

हरियाणा की एक कंपनी में काम करने वाले मनोज ने कहा कि कंपनी से पैसे मिले नहीं. जब खाने-पीने को भी संकट उत्पन्न हो गया तो पैदल ही पलवल से चलकर यहां तक पहुंचा. उन्होंने भी कहा कि घर पर ही रहकर गुजारा कर लेंगे. आपसी लड़ाई में बेटे की मौत से व्यथित सरजू देवी ठेले पर बैठकर ही आगरा तक पहुंच गईं. महोबा जा रही सरजू देवी ने कहा कि वो अपने बेटे के हत्यारों को जेल भिजवाने के लिए महोबा जा रही हैं.

प्रवासी मजदूरों की संख्या और उनके दर्द अनगिनत हैं. कई सारे मजदूर ट्रक से आए. कुछ ने पैसे दिए तो कइयों को पैसे नहीं देने पड़े. सबके सामने जिंदगी की चुनौती है. यह भी नहीं पता कि जब गांव वापस जाएंगे तो रोजी-रोटी कैसे कमाएंगे, लेकिन सबसे बड़ा आश्वासन यही है कि अपने गांव जा कर जिंदा रहेंगे. कुछ मजदूर तय कर चुके हैं कि वापस शहर का रास्ता नहीं तय करना, लेकिन कई सारे मजदूर जानते हैं कि पेट की आग जल आएगी तो कदम खुद-ब-खुद शहर की ओर चले आएंगे.

सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना भी चुनौती

प्रवासी मजदूरों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना भी बड़ी चुनौती बन रहा है. आगरा के आईजी सतीश गणेश ने कहा कि सरकार के आदेश पर बसों का इंतजाम किया गया है. प्रवासी मजदूरों को बसों से उनके गंतव्य तक भेजा जा रहा है. उन्होंने कहा कि कोशिश की जा रही है कि एक भी प्रवासी मजदूर पैदल न चले. आईएसबीटी को सैनिटाइज करने का काम भी लगातार किया जा रहा है.

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