WEO-2021: उभरती ऊर्जा अर्थव्यवस्था 2050 तक नेट ज़ीरो के लिए नाकाफ़ी

नई दिल्ली: जिस रफ्तार से सौर और पवन ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन आदि अन्य कम कार्बन प्रौद्योगिकियां फल-फूल रही हैं, उसके मद्देनज़र यह साफ़ है कि दुनिया में एक नई ऊर्जा अर्थव्यवस्था उभर रही है। लेकिन यह उभरती अर्थव्यवस्था नेट ज़ीरो के लक्ष्य हासिल करने के लिए काफ़ी नहीं।

यह संकेत मिलता है COP26 से पहले, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा आज जारी वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक से, जो स्पष्ट करता है कि वैश्विक उत्सर्जन को नेट ज़ीरो की ओर बढ़ते हुए उसमें निरंतर गिरावट लाने के लिए मौजूदा गति अभी भी बहुत कम है।

फ़िलहाल जब नीति निर्माता जलवायु परिवर्तन और अस्थिर ऊर्जा बाजारों दोनों के प्रभावों से जूझ रहे हैं, विश्व ऊर्जा आउटलुक 2021 (WEO-2021) को ग्लासगो में COP26 जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के लिए एक पुस्तिका के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जो एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी जलवायु कार्रवाई और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में तेजी लाने के लिए।

पहली बार, WEO में एक ऐसा परिदृश्य शामिल है जो केंद्रीय परिदृश्य के रूप में 2050 तक नेट ज़ीरो ऊर्जा प्रणाली का मार्ग दिखाता है। यह एक वास्तविकता दिखाता है जिसमें:-

2030 तक, रिन्यूएबल ऊर्जा में वार्षिक निवेश जीवाश्म ईंधन उत्पादन में निवेश को पार कर जाएगा: एक ही वर्ष में रिन्यूएबल ऊर्जा से बिजली उत्पादन के लिए $1.3 ट्रिलियन के निवेश का अनुमान है

LNG (एलएनजी) में निवेश एक सुरक्षित विकल्प नहीं है: कुल फंसी हुई पूंजी का अनुमान 75 अरब USD (अमेरिकी डॉलर) है; जिसका मतलब है कि वर्तमान में निर्माणाधीन LNG परियोजनाओं से जुड़े अधिकांश निवेशक अपनी निवेशित पूंजी की वसूली नहीं कर पाएंगे;

विश्व की 90% से अधिक आबादी दैनिक आधार पर प्रदूषित हवा में सांस लेती है, जिसके कारण IEA (आईईए) का अनुमान है कि एक वर्ष में 5 मिलियन से अधिक प्रीमैचोर (समय से पहले) मौतें होती हैं। नेट ज़ीरो परिदृश्य के तहत, इस संख्या को गंभीर रूप से कम किया जा सकता है: 2020 की तुलना में, 2030 तक प्रति वर्ष घरेलू वायु प्रदूषण से 1.9 मिलियन कम प्रीमैचोर मौतें होती हैं, जिसमें 95% से अधिक की कमी उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में होती है।

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