ये कौन सा फल है, अमरूद है क्या

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ilahabadi amrudh3इलाहाबाद। इस तस्वीर को देख कर आप कुछ चौंक गये होंगे क्या। जी हां अगर ये सेव होता तो खबर ही नहीं थी। चलिये अकबर इलाहाबादी की ये लाइनें तो आपको बखूबी याद होंगी। ‘कुछ इलाहाबाद में सामं नहीं बहबूद के, यहां धरा क्या है ब-जूज अकबर के और अमरूद के।’  जी हां इलाहाबाद में आकर किसी ने यहां का अमरूद नहीं चखा तो क्या चखा। बात है यहां के अमरूदों की जिसका इतिहास भी काफी रोचक है।
इलाहाबाद की धरती पर कदम रखते ही लोगों की इच्छा संगम स्नान और इलाहाबादी अमरूद खाने की होती है। देखने में सुंदर और स्वाद में मीठा होने की वजह से इलाहाबादी अमरूद सबको अपनी ओर आकर्षित करती है। इतनी सुंदर बनावट अमरूद की किसी प्रजाति में नहीं होती है।
संकर प्रजाति से लोग खा जाते धोखा
इलाहाबादी अमरूद की लोकप्रियता से सभी परिचित हैं लेकिन इसकी पहचान बहुत कम ही लोग जानते हैं। संकर (हाइब्रिड) प्रजाति से लोग धोखा खा जाते हैं। इलाहाबादी अमरूद अंदर और बाहर दोनो तरफ से लाल होता है। जबकि हाइब्रिड इलाहाबादी अमरूद केवल उपर से लाल होता है लेकिन अंदर से लाल नही होता है। स्वाद में भी उतनी मिठास नहीं होती है। इस वजह से संकर प्रजाति से लोग धोखा खा जाते है।
महत्व बढ़ाने के लिए शहर में लोग सक्रिय
इलाहाबादी अमरूद को बढा़वा देने के लिए शहर में पहली बार पर्यटन विभाग और सांस्कृतिक संस्था ‘संचारी’ के नेतृत्व में इसके लिए खास ‘अमरूद फेस्टिवल’ का आयोजन किया जा रहा है। लोगों को इलाहाबादी अमरूद के महत्ता से रूबरू कराने के लिए शहर के ऐतिहासिक स्थल खुशरूबाग में   ‘अमरूद फेस्टिवल’ का आयोजन किया गया है। यहां  न केवल लोग अमरूद के इतिहास से परिचित होंगे, बल्कि आपको यहां अमरूद की हर वह प्रजाति मिलेगी, जिसका आपने सिर्फ नाम सुना होगा। फिर चाहे वह क्यों न लाल ‘सुर्खा’ हो या बीजी। सफेदा की खुशबू हो या एप्पल की रंगत। अमरूद से बनने वाली खाद्य सामग्री भी फेस्टिवल का आकर्षण होगी।

‘संचारी’ संस्था की कोषाध्यक्ष  पल्लवी चंदेल का कहना  हैं कि मेले में ग्वावा चीज, ग्वावा जूस, ग्वावा जैम भी रखी जाएगी। पर्यटकों संग शहरवासियों को अमरूद के  इतिहास से परिचित कराया जाएगा। मसलन अमरूद का प्रचलन कब से शुरू हुआ। वह कौन-कौन सी हस्तियां थीं, जिन्होंने अमरूद को पसंद किया।

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