मुसलमानों से आपका रिश्ता क्या है, तो PM मोदी से मिला ऐसा जवाब

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और इंटरव्यू दिया है। एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने गांधी परिवार से लेकर राम मंदिर और मुस्लिमों तक खुलकर अपनी बात रखी है। पढ़िए मोदी के इंटरव्यू की खास बातें –

– जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा गया कि हिंदुस्तान के मुसलमानों से रिश्ता क्या है? तो पीएम ने जवाब दिया, ‘जब सच्चर कमेटी की रिपोर्ट आई थी और उन्होंने मुझसे पूछा था कि मोदीजी आपने मुसलमानों के लिए क्या किया, तो मेरा जवाब था, मैंने मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया और कुछ नहीं करूंगा। मैंने हिंदुओं के लिए भी कुछ नहीं किया, ना करूंगा। मैंने गुजरातवारियों के लिए बहुत कुछ किया और करता रहूंगा।’

पीएम ने आगे कहा, प्रधानमंत्री बनने के बाद मैंने जो भी योजनाएं चलाई हैं, वो देशवासियों के लिए है, केवल हिंदुओं या केवल मुस्लिमों के लिए नहीं है। जब मैं कहता हूं कि 2022 तक देश के हर परिवार के पास अपना पक्का मकान होगा तो हर परिवार की बात कर रहा हूं, न कि कुछ वर्गों की।

– देश के शासकों को ये अलगाववादी विचारों से मुक्त होना चाहिए। देश को एक इकाई के रूप में यूनिटी के रूप में देखना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए। इसलिए मेरी सारी योजनाएं सबका साथ सबका विकास इस मंत्र को लेकर चल रही हैं।

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– मेरी सरकार ने 60 महीनों में वो काम करके दिखाया है जो इससे पहले कभी नहीं हुआ। इसका पूरा श्रेय जनता को जाता है, जिन्होंने मुझ पर और मेरी सरकार पर भरोसा दिखाया। इससे पहले लोगों को सरकारों से कोई उम्मीद नहीं होती थी। लोग सोचते थे कि कुछ नहीं होना वाला, लेकिन यह पहली सरकार रही, जिससे लोगों को बहुत ज्यादा उम्मीदें थीं। हमने मिशन मोड में काम किया। कुछ सख्त फैसले भी लिए। यही कारण है कि मैं अभी पूरे देश में देश के मतदाताओं को धन्यवाद करने का प्रवास कर रहा हूं।

देश के सामने मैंने एक नया वर्क कल्चर, मिशन मोड में पूरे समर्पित भाव से सरकार चलाना, कड़े फैसले लेने पड़ें तो वो भी लेना, उसके कारण आप देख सकते हैं कि देश को एक गतिशील सरकार, एक काम करने वाली सरकार देश ने देखी है।

– मैं और अटल बिहारी वाजपेयी दो ही प्रधानमंत्री ऐसे रहे जो कांग्रेस गोत्र से नहीं हैं। इसलिए हम बाकी प्रधानमंत्रियों से अलग हैं और हमारे काम करने का तारीका भी अलग है। देश ने अनुभव किया है कि एक प्रधानमंत्री लगातार काम करता रहे, कोई सवाल नहीं करता, एक प्रधानमंत्री सिर्फ और सिर्फ देश के लिए लगा रहे और कोई सवाल नहीं करता।

कांग्रेस के मेनिफेस्टो पर प्रधानमंत्रीने कहा- कांग्रेस ने 60 साल से भी अधिक साल तक देश में राज किया, उनके पास अनुभवी नेता हैं, सरकार की बारीकियों को जानते हैं, ऐसे समय में कांग्रेस के पास से एक मैच्योर घोषणापत्र की अपेक्षा होना बहुत स्वाभाविक है।

– कांग्रेस पार्टी के घोषणापत्र ने बहुत निराशा पैदा की है, अच्छा होता कि वो बीजेपी से भी शानदार चीजें लेकर आती, लोकतंत्र में अच्छा होता है लेकिन उसके बजाय उन्होंने शॉर्टकट ले लिया।

कांग्रेस ने 2004 में वादा किया था कि वो हर घर में बिजली पहुंचाएंगे 2014 में आने के बाद भी मैंने अभी तक ढाई करोड़ परिवारों तक पहुंचाया है फिर भी अभी मैं लक्ष्य से अभी थोड़ा बाकी हूं, शायद अभी मई-जून तक काफी कुछ कर दूंगा।

– उन्होंने वादा किया था कि किसानों को MSP देंगे, उन्होंने किसानों को जो MSP देना चाहिए उसे बढ़ाने की बात कही थी, उसके विषय में कुछ नहीं किया. इसलिए उनका ट्रैक रिकॉर्ड चुनावी वादों वाला है।

– कांग्रेस जैसी पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर घोषणापत्र में ऐसी बात कर रही है। देश की सेना को इतना जलील करें, बलात्कार के आरोप वाली बातें करें, ऐसा शोभा देता है क्या?

हम ऐसा हिन्दुस्तान चाहते हैं जिसमें AFSPA हो ही ना, लेकिन वो स्थिति तो लाएं पहले। आज पाकिस्तान जिस प्रकार से घटनाएं कर रहा है, जो सेपरेटिस्ट लोग भाषा बोलते हैं, जो पाकिस्तान स्पॉन्सर्ड भाषा है। उस भाषा की अगर इस घोषणापत्र में बू आती है, तो देश के सुरक्षाबलों के जवानों को आप कितना डिमोरलाइज कर रहे हैं।

– कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन पर प्रधानमंत्री ने कहा- जिस दिन हमने गठबंधन किया, एक तो तब मुफ्ती साहब थे, मैच्योर थे। हमने उस समय कहा कि हम दो राजनीतिक पार्टियां हैं जो दो ध्रुव के हैं, एक प्रकार से मिलावट वाला ही कार्यक्रम था हमारा। कोई सिचुएशन ही नहीं थी कि कोई सरकार बन पाए। अगर नेशनल कॉन्फ्रेंस उस समय मुफ्ती साहब को सहयोग देकर खड़ी हो जाती तो हम तो विपक्ष में रहने के लिए तैयार थे, हमने इंतजार किया था। वहां तीन महीने तक सरकार बनाई ही नहीं थी। हम ऐसी पोजिशन में नहीं थे कि हम सरकार बनाएं, इसीलिए हमने कभी क्लेम नहीं किया।

– कश्मीर के हित में एक मिनिमम एजेंडा लेकर कुछ कर सकते हैं क्या? हमने चलाने की कोशिश की, लेकिन मुफ्ती साहब चले गए, महबूबा जी का एक अलग काम करने का तरीका था। एक बड़े महत्वपूर्ण मुद्दे की वजह से ये ब्रेक हुआ।

– हमारा स्पष्ट मत था कि जम्मू कश्मीर में स्थानीय निकायों के चुनाव होने चाहिए, पंचायत के, नगरपालिका के और वहां की जनता को अपना कारोबार चलाने का हक देना चाहिए।

– एयर स्ट्राइक का सबसे बड़ा सबूत पाकिस्तान ने दुनिया को दिया। उन्होंने ही बताया कि भारत ने हमला किया है। हमने पाकिस्तानी नागरिकों या सैनिकों को निशाना नहीं बनाया। हमारी रणनीति यही थी, क्योंकि ऐसा होता तो पाकिस्तान चिल्ला-चिल्लाकर दुनिया को बताता। इसलिए पाकिस्तान ने किसी भी हालत में इस घटना को दबाए रखा। चिंता की बात यह है कि हमारे ही देश के लोग इसके सबूत मांग रहे हैं।

– पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में नवाज शरीफ ठीक थे या इमरान खान, इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, पाकिस्तान चलाना मेरी जिम्मेदारी नहीं है.. वो क्या करते हैं क्या नहीं करते हैं.. कैसे करते हैं। वो सारी बातें पाकिस्तान की जनता पर हम छोड़ दें।

– दुनिया के लोगों को भी नहीं पता कि पाकिस्तान में आखिर देश कौन चलाता है, चुनी हुई सरकार, सेना, ISI, या जो लोग पाकिस्तान से भागकर विदेशों में बैठे हैं वो चला रहे हैं और इसलिए हर किसी के लिए ये बड़ा चिंता का विषय है कि किससे बात करें।

– उमर अब्दुल्ला कहते हैं कि देश में दो प्रधानमंत्री होने चाहिए। अब कांग्रेस पार्टी को जबाव देना पड़ेगा कि आपका साथी कह रहा है कि दो प्रधानमंत्री होने चाहिए तो आपका स्टैंड क्या है? फिर उसके साथ क्यों चलते हो ?एनसी का एक कैंडिडेट कहता है कि अगर कोई पाकिस्तान को गाली देगा तो मैं हिंदुस्तान को सौ गाली दूंगा। उसके साथ आप चुनाव में भागीदार हैं, ये महामिलावट है।

– आंबेडकर ने कहा था कि वंशवाद लोकतंत्र के लिए खतरा है। तब तो मोदी पैदा भी नहीं हुआ था. उस विचार के व्यक्ति ने देश को संविधान दिया है। उस अर्थ में मैं कहता हूं कि लोकतंत्र में वंशवाद ये उचित नहीं है। मैं किसी का नाम नहीं लेता हूं।

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