शिवलिंग के सामने बैठे नंदी के कान में क्या कहते है भक्त, जानें इसका बड़ा राज़

लखनऊ: सावन का महीना चल रहा है और हर कोई मंदिर में इस समय भगवान शिव के दर्शन करने के लिए जाता है। ऐसे में आप लोगो ने देखा होगा कि कुछ लोग शिवलिंग के सामने बैठे नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहते हैं। अब ये एक परंपरा बन गई है और इसके पीछे मान्यता भी है।

हिंदू मान्यता के मुताबिक, शिव मंदिर में नंदी जी की स्थापना जरूर की जाती है क्योंकि भगवान शिव के परम भक्त नंदी हैं। जब भी कोई व्यक्ति शिव मंदिर में आता है तो शिव जी की पूजा के बाद नंदी के कान में अपनी मनोकामना जरूर कहता है।

इसके पीछे मान्यता है कि भगवान शिव तपस्वी हैं और वे हमेशा समाधि में रहते हैं। ऐसे में उनकी समाधि और तपस्या में कोई विघ्न न पड़े इसलिए नंदी ही हमारी मनोकामना शिवजी तक पहुंचाते हैं। इसी मान्यता के चलते लोग नंदी को लोग अपनी मनोकामना कहते हैं।

नंदी नहीं थे खुश

मान्यता के अनुसार, एक बार नंदी के पिता बुजुर्ग हो गए थे तो उन्होंने भगवान शिव से अपने पुत्र नंदी को घर बुला लिया था। लेकिन इस बात से नंदी खुश नहीं थे और वो कैलाश छोड़कर धरती पर रहने लगे थे। धरती पर उन्हें भगवान शिव के बिना कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था।

तपस्या से खुश हुए महादेव

एक हिसाब से तपस्या मानकर वो खाना पीना छोड़कर भगवान शिव को ही पूजा करते थे, अंततः भगवान शिव नंदी की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि आज के बाद तुम मेरे सबसे परम् भक्त हो और जो भी अपनी मनोकामना तुम्हारे कान में कहेगा वो सीधा मुझतक आएगी इसके बाद उन्हें अपने साथ ले गए।

 

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