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एंटी Pollution गाइडलाइन्स के बार बार टालने का क्या होगा जनता पर असर ?

नई दिल्ली : कोयला बेस्ड पावर प्लांट के सुधार के लिए लाये गए एंटी Pollution गाइडलाइन्स को भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने फिर दो साल के लिए टाल दिया।

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देश की राजधानी दिल्ली सहित आबादी वाले क्षेत्रो में बने इन पॉवरप्लांट्स को अब एंटी पॉलुशन गाइडलाइन्स के पार्टिकुलेट मैटर, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड सहित दूसरे मानकों को अब दिसंबर 2022 तक पूरा करना होगा। कोयला, जो भारत की लगभग 65% बिजली का उत्पादन करने में मदद करता है, वह देश के कई शहरों में प्रदुषण करने के साथ-साथ हजारों नागरिकों की बीमारियों और समय से पहले मौत का भी ज़िम्मेदार है।

2015 से टल रही है एंटी Pollution गाइडलाइन्स

पर्यावरण मंत्रालय ने 2015 में एंटी पॉलुशन गाइडलाइन्स पेश किया, जिसके बाद कोयला बेस्ड पॉवरप्लांट्स को दो साल का समय दिया गया था ताकि वह अपने में सुधार कर सके। लेकिन जब पावरलान्ट्स ने इस वक़्र्त को नाकाफी बताते हुए विरोध किये तो सरकार ने इस संशोधन की सीमा को 2022 तक फिर बड़ा दिया है।  मौजूदा समय में अगर इन पावरलान्ट्स की हालत पर नज़र डालेंगे तो आपको पता चलेगा की कई प्लांट्स की हालत इतनी खस्ता है की उनके लिए यह वक़्त भी कम पड़ जाएगा।

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