Masood Azhar के साथ क्या होगा जब वो ग्लोबल आतंकी घोषित होगा , जानें किन चीजों पर लगेंगे प्रतिबंध

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पुलवामा आतंकी हमले का मास्टरमाइंड, पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर पर बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाया जाएगा। मसूद अजहर को वैश्वक आतंकी घोषित करने पर लाए जा रहे प्रस्ताव में चीन का रुख भी स्पष्ट होगा। चीन के रवैए के कारण ही मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने का प्रस्ताव रुका पड़ा है। क्योंकि हर बार चीन ही इस प्रक्रिया में रोड़ा अटकाता है।

ऐसे में आज अगर चीन अन्य देशों के द्वारा लाए जा रहे इस प्रस्ताव को समर्थन देगा तो आतंकवाद रोकथाम की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल होगी। बता दें कि अब तक भारत सहित दुनिया के कई देशों ने चीन को समझाने का प्रयास किया था लेकिन चीन का रुख अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है। इनमें मुख्य तौर पर अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे विकसित देश भी शामिल थे। इन देशों के इस कदम से पाकिस्तान पर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को बैन करने का बड़ा दबाव बन गया है। भारत ने सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों में भी इस मामले में अपने साथ कर लिया है।

मसूद अजहर पर लगे प्रतिबंध तो क्या होगा-
बता दें कि किसी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के द्वारा अगर किसी के ऊपर प्रतिबंध लगा दिया जाता है तो उसका यूएन के सदस्य राष्ट्र देशों की यात्रा करने पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाएगा। मसूद अजहर के साथ भी यही होगा। एक बार उस पर वैश्विक आतंकवादी का ठप्पा लग जाता है तो उसकी सारी चल-अचल संपत्ति फ्रीज कर दी जाएगी। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े जितने भी सदस्य देश हैं वे उसकी किसी भी तरह की सहायता नहीं कर पायेंगे और ना ही उसे कहीं से हथियारों की आपूर्ति हो पाएगी।

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कौन-कौन से देश हैं प्रस्ताव के समर्थन में
भारत के अलावा मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित कराने के लिए फ्रांस, रुस और ब्रिटेन ही नहीं अमेरिकी भी पुरजोर कोशिश कर रहा है। ये सभी यूएनएससी में प्रस्ताव ला चुके हैं। इसके अलावा न्यूजीलैंड और इजरायल ने भी इन्हें समर्थन देने की पेशकश की है। सऊदी अरब, यूएई और तुर्की ने भी समर्थन का ऐलान किया है।

इस तरह भारत ने जुटाया समर्थन
बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को विश्व स्तर पर बैन करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। इसके लिए भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले ने अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो से मुलाकात कर उन्हें सारी चीजों से अवगत कराया था। गौरतलब है कि इस आतंकी घटना के बाद से ही नहीं भारत पिछले 10 सालों से मसूद अजहर को बैन करने की मांग कर रहा है। इसके लिए सबसे पहले 2009 में भारत की तरफ से यूएनएससी में प्रस्ताव लाया गया था, फिर 2016 में भी प्रस्ताव लाया गया लेकिन चीन ने बीच में रोड़ा अटका दिया। 2017 में भारत ने फिर से कोशिश की लेकिन हर बार की तरह चीन फिर से बीच में आ गया।

क्या है चीन का रुख
चीन हर बार यही कहता आया है कि केवल बातचीत से ही दोनों मुल्कों का समाधान निकाला जा सकता है। चीन का कहना है कि हम क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहते हैं इसके लिए वह हर बार अपनी कोशिशें जारी रखेगा। इतना ही नहीं कई बार चीन भारत से यून के मंच पर आतंक का मुद्दा ना उठाने की बात भी कर चुका है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर हुई पाक की थू-थू
बता दें कि पुलवामा हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र ने इसकी कठोर निंदा की थी इसके साथ ही सभी देशों से से भारत के साथ आने की अपील की थी। यूएन में निंदा प्रस्ताव पास हुआ जिसमें जैश को जिम्मेदार माना गया। निंदा प्रस्ताव का चीन समेत 10-15 देशों ने समर्थन किया।

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