सादगी कहां गयी, ये क्या हो गया इस शहर को

इलाहाबाद। आजादी के पहले से लेकर बाद तक  देश की सियासत का केंद्र रहा शहर मोती लाल नेहरू, जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री इंदिराा गांधी, हेमवतीनंदन बहुगुणा आदि नेताओं की सादगी और नैतिकता की मिसाल के रूप में प्रसिद्ध रहा। शहर से चुने गए जनप्रतिनिधि देश में अपनी एक अलग ही पहचान कायम किए हुए थे लेकिन धीरे-धीरे दंबगों का प्रवेश हुआ और उन्होंने शहर की राजनीति को हाशिए पर लाकर खड़ा कर दिया।Lal-Bahadur-Shastri

शहर में 90 के दशक में और उसके बाद कुछ घटनाएं ऐसी  हुईं जिससे यहां की राजनीति का  गौरव समाप्त हो गया।  राजनीति में प्रवेश करने के लिए कुछ जनप्रतिनिधियों की हत्या ने देश में शहर की पहचान ही बदल दी।

1996 में सपा विधायक जवाहर सिंह यादव पंडित और 2004 में बसपा विधायक राजू पाल की सरेआम हत्या कर दी गई थी। दोनों मामलों के पीछे सियासी संघर्ष रहा और इनमें बड़े राजनीतिक लोग आरोपी बनाए गये। मामले अभी अदालतों में लंबित चल रहे हैं।

कपिल मुनि करवारिया
कपिल मुनि करवारिया

सबसे पहले हुआ ए.के.47 का इस्तेमाल
शहर के सबसे व्यस्तम इलाके सिविल लाईंस में 13 अगस्त 1996 को  तत्कालीन झूंसी विधायक जवाहर पंडित की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई। इस हमले में उनके साथ दो अन्य करीबियों की भी मौत हो गई थी। इस कांड में पहली बार  किसी की हत्या के लिए एके 47 का इस्तेमाल किया गया था। सूत्रों से मिली जानकारी पर भरोसा करे तो  हत्या के लिए भाड़े के शूटरों को सुपारी दी गई थी। हालांकि इसके पीछे बालू खनन, शराब के कारोबार और सियासी वर्चस्व होने की बात सामने आई थी। इस मामले में भाजपा के दिग्गज करवरिया परिवार के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई।
जवाहर पंडित के परिजनों की ओर से कपिल मुनि करवरिया, उदयभान करवरिया और सूरजभान करवरिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।  करवरिया बन्धु उस समय भाजपा में थे, इसके बाद ही  कपिल मुनि करवरिया फूलपुर से बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर सांसद बने।

उदयभान करवरिया भाजपा के टिकट पर विधायक और सूरजभान सपा से एमएलसी बने थे। वहीं, जवाहर पंडित की सीट से उनकी पत्नी विजमा यादव कई बार विधायक बनीं। इस मामले की दो बार सीबीसीआईडी जांच हुई और दोनों बार इसकी जांच रिपोर्ट अलग-अलग आई।

इसी साल इस मामले में कपिलमुनि और सूरजभान ने सरेंडर किया था। पूर्व विधायक उदयभान सहित तीनों भाई जेल में हैं। जिले और प्रदेश के इस हाई प्रोफाइल मामले का ट्रायल शुरू हो गया है।

अतीक अहमद
अतीक अहमद

सरेआम बसपा विधायक राजूपाल की हत्या
शहर के मोस्ट वांटेड में शुमार राजू पाल इलाहाबाद की शहर पश्चिम सीट से चुनाव जीतकर विधायक बना। शहर पश्चिमी सीट बाहुबली अतीक अहमद की सीट होने के कारण पूरे प्रदेश में खासा चर्चित रहा करती थी। अतीक अहमद फूलपुर से सपा से सांसद बने तो उन्होंने इस सीट से अपने छोटे भाई अशरफ को सपा से टिकट दिलवाया।

लगातार चार बार से इस सीट पर अतीक जीतते आए थे इसलिए वो अपने भाई की जीत को लेकर आश्वस्त थे। बसपा ने इस सीट पर राजू पाल को प्रत्याशी बनाया। राजू राजनीति के पिच पर नए खिलाड़ी थे। चुनाव बहुत जबरदस्त रहा। सितंबर 2004 में परिणाम घोषित हुए तो अप्रत्याशित तौर पर राजू पाल ने अतीक के भाई अशरफ को पराजित कर दिया। लेकिन राजू पाल ज्यादा दिन विधायकी नहीं कर सके।

परिणाम आए छह महीने भी नहीं बीते थे कि राजू पाल की दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह शहर की सबसे दुस्साहसी वारदात मानी जाती है। राजूपाल घटना से नौ दिन पहले अपनी प्रेमिका पूजा पाल से  शादी की  थी।

puja pal file photoराजू पाल के परिवार ने हत्या के पीछे अतीक और उनके भाई का हाथ होने का आरोप लगाया। राजू की हत्या के एक साल बाद हुए उपचुनाव में बसपा ने पूजा पाल को प्रत्याशी बनाया लेकिन वो अशरफ से चुनाव हार गईं। तब पूजा पाल ने आरोप लगाया कि उन्हें प्रशासन ने सपा सरकार के इशारे पर चुनाव हरवा दिया था।

2007 में आम चुनाव में बसपा ने फिर पूजा को टिकट दिया और सपा से अशरफ मैदान में थे।  इस बार पूजा ने अशरफ को मात दी। सरकार बसपा की बनी और मायावती ने मुख्यमंत्री बनते ही मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। पांच महीने गायब रहने के बाद अशरफ, अतीक अहमद को जेल जाना पड़ा। तब वे सपा में थे लेकिन सपा ने उनसे पल्ला झाड़ लिया।

इस मामले में अशरफ को भी नोएडा से गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में अतीक को करीब दो साल और अशरफ को तीन साल जेल में रहने के बाद जमानत मिली थी।  मामले कोर्ट में लम्बित हैं।

मंत्री पर बम से हमला बालबाल बचे
बसपा सरकार में मंत्री रहे नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर 2010 में उनके घर से कुछ कदम दूरी पर बम से हमला किया गया। तब नंदी अपने घर से कुछ दूर स्थित एक मंदिर में पूजन के लिए जा रहे थे। तभी एक स्कूटर में छिपाकर रखे गए बम से तत्कालीन स्टाम्प, न्यायिक कर और संस्थागत वित्त मंत्री नंदी को निशाना बनाया गया। इस हमले में वो गंभीर रूप से घायल हुए। इस हमले में एक स्थनीय पत्रकार और मंत्री के निजी सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सुरक्षाकर्मी की बाद में मौत भी हो गई।

इस मामले में सपा के बाहुबली विधायक विजय मिश्र और एक अन्य को आरोपी बनाया गया। मिश्र को पुलिस ने गिरफ्तार किया। फिलहाल आरोपियों को जमानत मिल गई है।

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