प्रणव मुखर्जी पीएम बनेंगे या नहीं, हो गया सबसे बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद शिवसेना ने प्रणव मुखर्जी को लेकर बड़ा बयान दिया था, जिसकी वजह से सियासी गलियारों में कौतूहल मच गया था। शिवसेना ने दावा किया था कि यदि पीएम मोदी 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में अपनी दावेदारी साबित कर पाने में नाकाम रह जाते हैं तो भावी पीएम के रूप में प्रणव मुखर्जी को सर्वसम्मति से जगह दी जा सकती है। वहीं अब इस बात पर विराम लगाते हुए प्रणव की बेटी ने साफ़ कर दिया कि इस बात में कितना वजन है।

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प्रणव मुखर्जी

खबरों के मुताबिक़ मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा ने कहा, ‘मिस्टर राउत, देश के राष्ट्रपति के पद से रिटायर होने के बाद मेरे पिता दोबारा सक्रिय राजनीति में नहीं आएंगे।’

आपको बता दें कि संजय राउत के अलावा यह बात शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में संपादकीय में भी कही थी।

शिवसेना ने कहा था कि अगर बीजेपी 2019 के आम चुनावों में बहुमत हासिल करने में नाकाम रही तो प्रणब मुखर्जी प्रधानमंत्री पद के लिए सर्वसम्मति से उम्मीदवार हो सकते हैं।

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संपादकीय में लिखा था, ‘आरएसएस के कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी को बुलाने के पीछे संघ की यही योजना रही होगी। जो भी एजेंडा होगा वह 2019 के चुनाव के बाद साफ हो जाएगा।

उस समय बीजेपी को बहुमत नहीं मिलेगा। देश में माहौल भी ऐसा ही है। ऐसे में लोकसभा त्रिशंकु रही और मोदी के साथ अन्य दल खड़े नहीं रहे तो प्रणब मुखर्जी को ‘सर्वमान्य’ के रूप में आगे किया जा सकता है।’

शिवसेना ने आगे लिखा था कि संघ ने कभी भी अपने कार्यक्रम में शिवसेना के पूर्व प्रमुख बाल ठाकरे को आमंत्रित नहीं किया था, क्योंकि उन्होंने हिंदुत्व का छिपा एजेंडा नहीं चलाया था, बल्कि वीर सावरकर की तरह उन्होंने खुलेआम हिंदुत्व का प्रचार किया था। संघ बाल साहेब का भार उठाने में असमर्थ था।

इसके साथ ही शिवसेना ने संघ पर मुसलमानों को खुश करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया था। सामना में कहा गया था कि संघ इफ्तार पार्टी आयोजित कर मुस्लिमों को खुश करने की कोशिश कर रही है।

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