तू तू , “मैं मैं” सब ठीक , पर सहिष्णुता के प्रमाण पत्र का ठेकेदार कौन? हमें भी……

विकास गोस्वामी: गंगा जमुना तहजीब वाला देश वही देश जहाँ हिन्दू मुस्लिम सिख इशाई आपस में सब भाई भाई वाले नारे लगते हैं| सब ठीक तो है, मैंने बचपन से यही सुना था जिधर देखो सब शांति ही शन्ति क्युकी कभी असलियत जानने की कोशिस नही की | दरसल राजनीती से जुड़ाव थोडा कम था| सेकुलर जैसा शब्द नया था मेरे लिए | सहिष्णु और असहिष्णु पढने में उतना ही मुश्किल लगता है जितना जीभ से नाक छूना | लेकिन जम के प्रैक्टिस किया और अब तो फटाफट पढ़ लेता हूँ |

सब ठीक ही तो चल रहा है देश में, हा कभी कभी भारत तेरे टुकड़े होंगे वाले नारे भी सुनने को मिल जाते है| नारे सुन के गुस्सा भी आता है पर क्या कर भी सकते है ये नारे हमेसा TV पर ही सुने कभी कभी फोन पर भी क्यों की अब तो फुल टाइम सोशल मीडिया पर नौकरी भी चल रही| वैसे सेकुलरिस्म की परिभाषा क्या है? या क्या होनी चाहिए?

https://www.youtube.com/watch?v=BZSpiuUJTD8&t=180s

क्या कश्मीरी पंडितो की बात करना असहिष्णुता है | वैसे कश्मीरियत है क्या क्यों की चर्चा बहुत होती है की कश्मीर की कश्मीरियत खतरे में है | वैसे एक चीज पूछना है , कश्मीर – कश्मीरी पंडित = कश्मीरियत होता है क्या? वैसे सेना पर पत्थर बरसाने वाले भटके हुए नौजवान हैं या पत्थरबाज? क्यों की अगर सेना इन लोगो पर एक्शन लेती है तो कश्मीरियत खतरे में आजाती है , ऐसा मैंने कई नेतावों से सुना है |

क्या इस देश में कोई सिख दंगो की बात नही कर सकता? क्या जब कश्मीर में कश्मीर बनेगा पाकिस्तान वाले नारे लग रहे थे , उस समय सेकुलिरिस्म का SARTIFICATE पाए लोग सो रहे थे| यदि आप को ऐसा लग रहा है की मैं गुजरात दंगे की बात नही करूंगा या गोधरा कांड की बात नही करूंगा तो ये आफ का व्यक्तिगत सोच है और मुझे इस बात से कोई आपत्ति नही है| वो सभी घटनाएँ जिससे इंसानियत शर्मसार होती है उन सभी घ्त्नावों से मुझे दिक्कत है|

https://www.youtube.com/watch?v=BZSpiuUJTD8&t=180s

अखंड भारत का  सपना और हर भारतीय खुश रहे ऐसे सपने मैं भी देख लेता हूँ | बॉर्डर पर जब कोई जवान शहीद होता है तो मुह में निवाला नही पड़ता जैसे लाइन का इस्तेमाल कर के अपने आप को देश भक्त साबित नही करूँगा | पर हा उस वक़्त एक कल्पना जरुर करता हूँ की यदि वो शहीद जवान अपने घर का होता तो क्या होता, यकीन मानिये रूह थर्रा उठती है| और अपने आप को होश में लाते हुए ये बोलता हु की यार पागल हूँ क्या मै भी क्या क्या सोचता रहता हूँ|

पर गहन सोच के बाद निष्कर्ष ये निकला की कुर्बानियों का स्थान अपने देश में सिर्फ राजनितिक एजेंडे का शिकार होना ही है, फिर वो काम चाहे सत्ता पक्ष करे या विपक्ष , कसर तो किसी ने नही छोड़ा है | सेना आतंकियों के खिलाफ एक्शन लेती है और उधर मीडिया में खबर चलती है की भारत में असहिष्णुता बढ़ गयी है| JNU के नारे “अफजल हम सर्मिन्दा हैं तेरे कातिल जिन्दा हैं ” जैसे नारे लगने पर तापमान बढ़ा हुआ नजर आता है |वैसे इस नारे की सच्चाई का सही अनुमान तो अब तक नही लग पाया पर हा इस नारे के बाद से भारत में FREEDOM OF EXPRESION का प्रचालन जोर तो पकड़ ही लिया| और अब तो आये दिन वन्दे मातरम, भारत माता की जय  जैसे नारे पर चुनावानुसार राजनीती भी हो जाती है| गुस्सा तो बहुत आता है पर कुछ बोलने के बाद देश में असहिष्णुता बढ़ जाती है| और कुछ लोगो को डर भी लगने लगता हैं |

लिखने के लिए और भी बहुत कुछ हैं | पर सोच थोड़ी ऐसी है की तुरंत नॉन सेकुलर का SERTIFICATE  देने वालों की लाइन लग जाएगी | अंत में किसी मसहुर कवि की चंद पंक्तियों के सहारे अपनी बात को आप सबके के सामने समेटता हूँ- की

बाट दिया इस धरती को , क्या चाँद सितारों का होगा

नदियों के कुछ नाम रखे , बहती धारों का क्या होगा

शिव की गंगा भी पानी है , आबे जमजम भी पानी है

मुल्ला भी पिए, पंडित भी पिए , पानी का मजहब क्या होगा

और इन फिरका परस्तो से पूछो क्या सूरज अलग बनाओगे

एक हवा में सांस है सबकी , क्या हवा भी नही चलाओगे

और नस्लों का करे जो बटवारा रहबर वो कौम का ढोंगी है

क्या खुदा ने मंदिर तोडा था या राम ने मस्जिद तोड़ी है

विकास गोस्वामी (puridunia.com)

 

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