कौन था नाथूराम और उसने गांधी को क्यों मारा

अभिनेता कमल हसन गांधी के हत्यारे गोडसे को आजाद भारत का पहला आतंकी कहा है। उन्होंने कहा, मैं ऐसा इसलिए नहीं बोल रहा हूं कि यह मुसलमान बहुल इलाका है, बल्कि मैं यह बात गांधी की प्रतिमा के सामने बोल रहा हूं आजाद भारत का पहला आतंकवादी हिन्दू था और उसका नाम नाथूराम गोडसे है। वहीं से इसकी (आतंकवाद) शुरुआत हुई। महात्मा गांधी की 1948 में हुई हत्या का हवाला देते हुए हासन ने कहा कि वह उस हत्या का जवाब खोजने आए हैं।

30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे ने राष्ट्रपिता गांधीजी की हत्या कर दी थी। गांधीजी की हत्या के जुर्म में नाथूराम को 15 नवंबर, 1949 को फांसी दी गई थी। नाथूराम हिंदू राष्ट्रवाद का कट्टर समर्थक था। उसने बहुत ही करीब से गांधीजी की छाती में तीन गोलियां मारी थीं, जिससे राष्ट्रपिता का निधन हो गया। नाथूराम का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उसने हाई स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। फिर वह स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गया था। ऐसा दावा किया जाता है कि गोडसे अपने भाइयों के साथ राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) से भी जुड़ा था। बाद में उसने ‘हिंदू राष्ट्रीय दल’ के नाम से अपना संगठन बनाया था जिसका मकसद स्वतंत्रता के लिए लड़ना था।

गोडसे ने अपना खुद का समाचार पत्र भी निकाला था जिसका नाम ‘हिंदू राष्ट्र’ था। उसकी लेखनी में काफी रुचि थी। उसके विचार और आर्टिकल कई समाचारपत्रों में छपते थे। बापू की हत्या के बाद नाथूराम गोडसे जेल में मिलने महात्मा गांधी के पुत्र देवदास गांधी गए थे। उनसे गोडसे ने कहा था कि तुम्हारे पिताजी की मृत्यु का मुझे बहुत दुख है।

इस मुलाकात का जिक्र नाथूराम के भाई और सह-अभियुक्त गोपाल गोडसे ने अपनी किताब गांधी वध क्यों, में किया है। गोपल गोडसे ने अपनी किताब में लिखा है, देवदास शायद इस उम्मीद में आए होंगे कि उन्हें कोई वीभत्स चेहरे वाला, गांधी के खून का प्यासा कातिल नजर आएगा, लेकिन नाथूराम सहज और सौम्य थे। उनका आत्मविश्वास बना हुआ था। देवदास ने जैसा सोचा होगा, उससे एकदम उलट। नाथूराम ने देवदास गांधी से कहा, मैं नाथूराम विनायक गोडसे हूं। आज तुमने अपने पिता को खोया है। मेरी वजह से तुम्हें दुख पहुंचा है। तुम पर और तुम्हारे परिवार को जो दुख पहुंचा है, इसका मुझे भी बड़ा दुख है। कृपया मेरा यक़ीन करो, मैंने यह काम किसी व्यक्तिगत रंजिश के चलते नहीं किया है, ना तो मुझे तुमसे कोई द्वेष है और ना ही कोई ख़राब भाव।

नाथूराम ने अपनी आखिरी भाषण में कहा था कि ‘मेरा पहला दायित्व हिंदुत्व और हिंदुओं के लिए है, एक देशभक्त और विश्व नागरिक होने के नाते। 30 करोड़ हिंदुओं की स्वतंत्रता और हितों की रक्षा अपने आप पूरे भारत की रक्षा होगी, जहां दुनिया का प्रत्येक पांचवां शख्स रहता है। इस सोच ने मुझे हिंदू संगठन की विचारधारा और कार्यक्रम के नजदीक किया। मेरे विचार से यही विचारधारा हिंदुस्तान को आजादी दिला सकती है और उसे कायम रख सकती है।’ नाथू का कहना था कि वो गांधी से प्रेरित था लेकिन उन्होंने देश का बंटवारे में अहम भूमिका निभाई और मुस्लमानों का साथ दिया और इसके एवज में उन्होंने ना जाने कितने ही हिंदू भेंट चढ़ गए। वास्तव में नाथू गांधी की धर्मनिरपेक्ष विचारधारा से नफरत करता था जोकि शायद संघ की विचारधारा को सुहाती नही थी इसलिए उसने प्रेरित होकर गांधी की हत्या की।

महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को 15 नवंबर 1949 को एक अन्य षडयंत्रकारी नारायण आप्टे को फांसी दी गई थी। नाथूराम गोडसे का शव सरकार ने परिजन को नहीं दिया था। जेल के अधिकारियों ने घग्घर नदी के किनारे पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। जेल में नाथूराम और आप्टे को बी कैटेगरी में रखा गया था। नाथूराम कॉफी पीने और जासूसी किताबें पढ़ने का शौकीन था। वो छुरी-कांटे से खाना पसंद करता था। हालांकि, जेल में उसे ये सुविधाएं नहीं मिली।

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