आसान नहीं है महबूबा मुफ़्ती का जम्मू कश्मीर का मुख्यमंत्री बनना

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mahbooba mufti
महबूबा मुफ़्ती

जम्मू| जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद अब कमान कौन संभालेगा इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालाँकि मुफ़्ती अपनी विरासत बेटी महबूबा मुफ़्ती को सौंपना चाहते थे लेकिन तस्वीर अभी साफ़ नहीं है। विधानसभा का बजट सत्र 18 जनवरी से शुरू हो रहा है। सत्तारूढ़ पीडीपी-भाजपा की यही इच्छा थी कि सदन का नेता इस दौरान सदन में मौजूद रहे। हालांकि, संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि सदन के नेता की मौजूदगी अनिवार्य नहीं है। उनकी अनुपस्थिति में भी सदन चल सकता है।

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राज्य के उप मुख्यमंत्री भाजपा के निर्मल सिंह हैं। और, परंपरा के हिसाब से मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी में सरकार के रोजाना के काम उप मुख्यमंत्री निपटाएंगे। लेकिन, फिर भी चर्चाओं का बाजार गरम है कि कौन चला रहा है सरकार। और, इस वजह से एक तरह की प्रशासनिक शिथिलता पैदा हो गई है। सत्ता के गलियारों में बस यही चर्चा है कि अब सईद के निधन के बाद कौन।

संविधान विशेषज्ञ जफर शाह ने कहा, “अगर सत्ता की कमान महबूबा मुफ्ती को सौंपनी है तो इसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया अपनानी होगी। पीडीपी विधायक दल को उन्हें अपना नेता चुनना होगा। इसके बाद राज्यपाल को इस आशय का पत्र भेजा जाएगा कि उन्हें 87 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत हासिल है। इसके साथ पीडीपी की सहयोगी भाजपा का महबूबा के लिए समर्थन पत्र भी चाहिए होगा। अगर भाजपा का पत्र नहीं होगा तो महबूबा को सदन में 15 दिन में अपना बहुमत साबित करने के लिए कहा जाएगा।”

शाह ने कहा कि महबूबा अभी न तो विधानसभा की और न ही विधान परिषद की सदस्य हैं। उन्हें किसी एक सदन के लिए चुनाव जीतना होगा। उन्हें परिषद का सदस्य नामित किया जा सकता है। शाह ने कहा कि राज्य के संविधान में कार्यवाहक मुख्यमंत्री का प्रावधान नहीं है।

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