कौन होगा अगले लोकसभा चुनाव का विजेता, सामने आ रही रणनीतियों से साफ़ हो रही तस्वीर

नई दिल्ली: अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में वैसे तो अभी लगभग एक वर्ष का समय बाकी है लेकिन सभी राजनीतिक दल इस चुनाव की तैयारियों में अभी से लग गए हैं। चुनाव में मुख्य मुकाबला वर्ष 2014 में अपना हुनर दिखा चुकी मोदी लहर और इस लहर को रोकने के लिए एकजुट हुई विपक्षी एकता के बीच में हैं। वैसे तो अभी यह कहना मुश्किल है कि इस चुनाव में जीत किसकी होगी लेकिन जिस तरह से अभी हाल ही में हुए चुनावों के नतीजे सामने आए हैं उससे तो विपक्षी दलों की एकता मोदी लहर को फीकी करती नजर आ रही है। बहरहाल, इन चुनावी नतीजों के बाद बीजेपी लहर ने भी अपनी रणनीति बदलना शुरू कर दिया है।

अभी हाल ही में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव और देश के कई राज्यों के लोकसभा और विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में जिस तरह से विपक्षी दलों ने एक साथ आकर मोदी सेना के परखच्चे उड़ाए, कहीं न कहीं मोदी ब्रिगेड में एक दहशत पैदा हो गई। क्योंकि इन उपचुनावों में न तो मोदी लहर काम आई और न ही बीजेपी के चाणक्य की कोई भी रणनीति।

विपक्षी एकता ने हर क्षेत्र में बीजेपी को धराशाई कर दिया। अब आलम यह हो गया है की बीजेपी को नए सिरे से रणनीति तय करनी पड़ रही है।

चाहे उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर हो या फिर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या का संसदीय क्षेत्र इलाहाबाद का फूलपुर हर जगह बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा है। वह भी उस हालत में जब बीते लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सूबे की 80 लोकसभा सीटों में से 75 सीटों पर अपना आधिपत्य स्थापित किया। इसी वजह से अब बीजेपी ने यूपी में भी एक नई रणनीति बनाई है।

इसी तरह बीजेपी ने अपने पुराने सहयोगी दलों को मनाने की कवायद भी शुरू कर दी है। अपने इस कदम को साकार करने के लिए  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नीति आयोग की बैठक में आंध्रप्रदेश और बिहार जैसे राज्यों को विशेष दर्जा प्रदान करने की मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के बंटवारे के समय तय किए गए वैधानिक प्रावधानों को अक्षरश: पालन करने को प्रतिबद्ध है।

आपको बता दें  कि आंध्र प्रदेश को वशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर ही राजग सदस्य पीडीपी ने इस सत्तारूढ़ गठबंधन से खुद को अलग कर लिया था। साथ ही मोदी सरकार के खिलाफ जमकर आग भी उगला था। केवल पीडीपी ही नहीं बिहार की सत्ताधारी जदयू भी बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर चुकी है।

इसी तरह आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा अपनी सहयोगी हरियाणा के सूरज कुंड में चल रही बैठक में बीजेपी ने एक नई रणनीति बनाई है। इस बैठक को देखते हुए लग रहा है कि पार्टी ने 2019 के चुनाव के लिए कमर कस ली है। इस बैठक के मुताबिक अब आरएसएस नेता और बीजेपी संगठन के मंत्री प्रत्येक लोकसभा में मौजूद सासंदों का ब्योरा लेंगे। जिसके बाद ही एक रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा और आगामी चुनाव में मंत्रियों को टिकट भी दिया जाएगा।

वहीं, अगर बात विपक्षी एकता की करें तो कांग्रेस इन दिनों सभी राज्यों के बीजेपी विरोधी दलों की ओर अपना मकड़जाल फेंकना शुरू कर दिया है। जिस तरह से कांग्रेस ने कर्नाटक चुनाव में जेडीएस की मदद से बीजेपी को शर्मनाक तरीके से सीएम की कुर्सी से दूर रखा और आगामी मध्य प्रदेश चुनाव में बसपा की सहायता से जंग का बिगुल बजाया है, उससे यह तो साफ़ है कि आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी सिर्फ दुश्मन के रूप में कांग्रेस को सामने नहीं पाएगी बल्कि कई क्षेत्रीय दल भी बीजपी की अगली जीत में रोड़ा अटकाने के लिए खड़ी है।

 

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