कुरुक्षेत्र में बनेगा देश के महान संत रविदास जी का मंदिर जानिए कौन है……

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हरियाणा:हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि संत रविदास जी का मंदिर कुरुक्षेत्र में बनेगा| जिसके लिए कुरुक्षेत्र में पांच एकड़ जमीन दी जाएगी| उपमुख्यमंत्री ने उचाना में पत्रकारों से कहा, “कुरूक्षेत्र जिले की पावन धरा पर ऐतिहासिक रविदास मंदिर की स्थापना होगी| 101 दिन के अंदर सरकार ने अपनी समीक्षा दी| प्रत्येक वर्ग को मूलभूत सुविधाएं कैसे दी जाएं, उस पर ऐतिहासिक निर्णय लिए गए|”

जानिए कौन है संत रविदास जी

संत रविदास का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था| रविदास  की माता का नाम कलसा देवी और पिता का नाम श्री संतोख दास जी था| रविदासजी के जमाने में दिल्ली में सिकंदर लोदी का शासन था| इसी के साथ कहते हैं सिकंदर लोदी ने उनकी ख्याति से प्रभावित होकर उन्हें दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा था, लेकिन उन्होंने बड़ी विनम्रता से ठुकरा दिया था| मध्ययुगीन साधकों में रविदास जी का विशिष्ट स्थान है| रविदासजी, कबीर की तरह ही उच्च कोटि के प्रमुख संत कवियों में विशिष्ट स्थान रखते हैं| स्वयं कबीरदास जी ने ‘संतन में रविदास’ कहकर इन्हें मान्यता दी है|

संत रविदास जी आडम्बर और बाह्याचार के घोर विरोधी थे| वे मूर्तिपूजा, तीर्थयात्रा आदि में बिल्कुल यकीन नहीं करते थे| वे व्यक्ति की निश्छल भावना और आपसी भाईचारे को ही सच्चा धर्म मानते थे| यही कारण है कि रविदासजी की काव्य-रचनाओं में सरलता के साथ व्यावहारिकता का समर्थन मिलता है| संत रविदास दूसरों की मदद करने में सबसे आगे थे| रविदास कभी किसी की मदद करने से पीछे नहीं हटते थे|

राजस्थान की कवयित्री और कृष्ण भक्त मीरा का रविदास से मुलाकात का कोई आधिकारिक विवरण तो नहीं मिलता है, लेकिन कहते हैं मीरा के गुरु रविदासजी ही थे| कहते हैं संत रविदास ने कई बार मीराबाई की जान बचाई थी|

उन्होंने अपनी कविताओं के लिए जनसाधारण की ब्रजभाषा का प्रयोग किया है| साथ ही इसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और रेख्ता यानी उर्दू-फ़ारसी के शब्दों का भी मिश्रण है| रविदासजी के लगभग चालीस पद सिख धर्म के पवित्र धर्मग्रंथ ‘गुरुग्रंथ साहब’ में भी सम्मिलित किए गए है| उनकी काव्य रचनाओं को रैदासी के नाम से जाता है|

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