आखिर मुख्यमंत्रि‍यों को क्यों सताता है नोएडा आने का डर

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309714-akhilesh-yadavनोएडा। माना जाता है कि जो भी मुख्‍यमंत्री आज तक नोएडा गया वह वापस फिर सत्‍ता में नहीं आ सका। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी थोड़ा सा डर का अहसास जरूर है तभी उन्‍होंने नोएडा आने से पहले ज्‍योतिषाचार्यों से परामर्श भी लिया। दरअसल मोदी आज नोएडा में दिल्‍ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का शिलान्‍यास करने वाले हैं। यूपी के सीएम अखिलेश यादव इस समारोह में भाग नहीं लेंगे।

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एक ओर जहां कुर्सी जाने के भय से आज तक कई मुख्यमंत्री नोएडा आने से कतराते रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एनएच-24 के चौड़ीकरण का शिलान्यास करने के लिए आज नोएडा आ रहे हैं। ऐसा नहीं है कि उन्होंने नोएडा के अभिशाप को नजरअंदाज कर दिया है, बल्कि उन्होंने ज्योतिषाचार्यों के माध्यम से ऐसे समय को चुना है, जो ग्रहदशाओं के अनुरूप हो।

क्‍या है नोएडा के पीछे की कहानी

लोगों का मानना है कि बिसरख गांव में रावण का जन्म हुआ था। इसी गांव में रावण को भगवान शिव ने बुद्धिमान और पराक्रमी होने का वरदान भी दिया था। पंडित राम कृष्‍ण वाजपेई ने बताया कि इस पूरे क्षेत्र में लगातार तांत्रिकों का वर्चस्व रहा। पंडित राम कृष्‍ण वाजपेई का मानना है कि रावण के जन्म और तंत्र-मंत्र के चलते यह भूमि अभिशापित है। इसलिए यहां जब भी कोई मुख्यमंत्री आता है तो उसकी सत्ता चली जाती है।

ये हुए हैं नोएडा के शिकार

(1) तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरबहादुर सिंह, जो 1988 में नोएडा में कालिंदीकुंज का उद्घाटन करने आए थे और इसके तुरंत बाद उनकी सरकार गिर गई थी।

(2) 1989 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी एक पार्क का उद्घाटन करने नोएडा के सेक्टर-11 आए और इसके तुरंत बाद उनकी सरकार गिर गई।

(3) 1998 में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह नोएडा के एक कार्यक्रम में आए थे और इसके बाद उनकी कुर्सी चली गई थी।

(4) 2004 में मुलायम सिंह यादव एक स्कूल के उद्घाटन के लिए आए थे और फिर वे दोबारा कुर्सी पर नहीं लौटे।

(5) 2011 में मायावती फिर से नोएडा आई, लेकिन इसके बाद हुए चुनाव में उनकी सत्ता चली गई।

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