इंडिया के chartered accountants को क्यों है हिंदी से बैर ?

लखनऊ : इंस्टीट्यूट ऑफ chartered accountants ऑफ इंडिया एक बार फिर हिंदी को लेकर विवादों में घिर गया है। इंस्टिट्यूट के प्रेसिडेंट निहार एन जंबूसरिया ने चार्टेड अकाउंटेंट्स को हिंदी भाषा का इस्तेमाल बढ़ाने की सलाह क्या दी, गैर-हिंदी भाषाओं के चार्टेड अकाउंटेंट सोशल मीडिया पर इसका विरोध जताने लगे।

chartered accountants कर रहे हैं अंग्रेजी की वकालत

रिपोर्ट के मुताबिक जंबूसरिया ने एक लिखित मैसेज में इंस्टिट्यूट के सदस्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स  को अपने हर कार्यों और दूसरे स्टेकहोल्डर्स से बातचीत के दौरान हिंदी को अपनाने की सलाह दी थी। इसके अलावा जंबूसरिया ने हिंदी को देश की राजभाषा बताते हुए उनसे हिंदी को बढ़ावा देने की भी अपील की।

वहीँ रविशंकर नाम के एक चार्टेड अकाउंटेंट ने इस कदम को अतार्किक बताते हुए कहा कि दक्षिण भारत में इसका कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा, “इस मौके पर ऐसे बयानों से बचना चाहिए। फिलहाल सीए एग्जाम के लिए हिंदी और अंग्रेजी भाषा में होता है। इस तरह के कदम से गैर-हिंदी भाषी राज्यों के लोग नाराज हो सकते हैं और क्षेत्रीय भाषाओं में भी सीए एग्जाम कराने की मांग उठ सकती है।”

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