आखिर क्यों मनाया जाता है ‘अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस, जानिए कारण ?

साल 1877 में मजदूरों ने अपने काम के समय को तय करने की मांग को लेकर एक आंदोलन शुरू किया जिसमें करीब 11 हज़ार फैक्ट्रियों के 3 लाख 80 हज़ार मजदूर शामिल हुए थे।

नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस 1 मई को मनाया जाता है यह दिन 1 मई 1886 से मनाया जा रहा है। बतादें कि जब अमेरिका की मजदूर यूनियनों ने काम का समय 8 घंटे से ज्यादा ना रखे जाने के लिए हड़ताल किया था, साल 1877 में मजदूरों ने अपने काम के समय को तय करने की मांग को लेकर एक आंदोलन शुरू किया जिसमें करीब 11 हज़ार फैक्ट्रियों के 3 लाख 80 हज़ार मजदूर शामिल हुए थे।

जब यह आंदोलन 1877 में शुरू हुआ तो धीरे-धीरे यह बढ़ता ही चला गया और 1 मई 1886 को पूरे अमेरिका में लाखों मजदूरों ने एकजुट होकर इस मुद्दे को लेकर हड़ताल किया।

भारत में कब हुई शुरूआत

इसकी शुरुआत भारत में सबसे पहले चेन्नई में हुई, चेन्नई में पहली बार मजदूर दिवस 1 मई 1923 को मनाया गया था।उस समय इसको मद्रास दिवस के तौर पर प्रमाणित किया गया था और इसकी शुरुआत भारतीय मजदूर किसान पार्टी के नेता कामरेड सिंह रावत यार ने शुरू की थी। बता दें कि इसको लेकर मद्रास हाई कोर्ट के सामने एक बड़ा प्रदर्शन किया गया और एक संकल्प करके यह सहमति बनाई गई कि इस दिवस को भारत में भी मजदूर दिवस के तौर पर मनाया जाए और इस दिन छुट्टी का ऐलान किया जाए। खास बात यह है कि इस दिन को भारत सहित 80 मुल्क में मनाया जाता है।

दरअसल पूरे विश्व में हर अलग-अलग कामों को लेकर एक विशेष दिन प्रमाणित किया गया जैसे डॉक्टर्स डे, इंजिनियर्स डे, प्रेस डे आदि वही किसी भी समाज, संस्था में मजदूरों कामगारों और मेहनतकशो की अहम भूमिका होती है।जिसमें उनकी एक बड़ी संख्या अपना योगदान देती है, किसी भी उद्योग में कामयाबी के लिए मालिक, सरमाया, कामगार और सरकार अहम हिस्सा होते है। कामगारों मजदूरों के बिना कोई भी औद्योगिक ढांचा खड़ा नहीं किया जा सकता है। जिसके कारण कामगारों और मजदूरों को सम्मान देने के लिए इस विशेष दिन को प्रमाणित किया गया जिसे आज पूरे विश्व में मजदूर दिवस के नाम से मनाया जाता है।

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