Kasturba Gandhi के Birthday पर क्यो मनाया जाता है राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस? जानिए महत्व और पूरा इतिहास

Kasturba Gandhi के जन्म दिवस के मौके पर देश में हर साल 11 अप्रैल को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है। भारत में मातृ मृत्यु की रफ्तार को कम करने के लिए इस दिन को खास महत्व दिया गया है।

लखनऊ: कस्तूरबा गांधी के जन्म दिवस के मौके पर देश में हर साल 11 अप्रैल को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस (National Safe Maternity Day) मनाया जाता है। भारत में मातृ मृत्यु की रफ्तार को कम करने के लिए इस दिन को खास महत्व दिया गया है।  माता और शिशु की सुरक्षा के लिए 11 अप्रैल को मातृत्व दिवस मनाया जाता है। गर्भावस्था की सही जांच-पड़ताल के तहत हर महिने की 9 तारिख को स्वास्थ्य केन्द्रों पर विशेष आयोजन होता है।

Kasturba Gandhi का जन्मदिन

जहां पर एमबीबीएस चिकित्सक गर्भवती महिलाओं की सम्पूर्ण जांच करती है। भारत में हर साल लगभग 45000 महिलाएं बच्चों को जन्म देने के दौरान अपनी जान गंवा देती हैं। यह संख्या दुनिया भर में होने वाली मौतों का करीब 12 प्रतिशत है। हालांकि स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय के मुताबिक भारत में मातृ मृत्‍यु दर में तेजी से कमी आई है। देश ने 1990 से 2011-13 की अवधि में 47 प्रतिशत की तुलना में मातृ मृत्‍यु दर को 65 प्रतिशत से ज्‍यादा घटाने में सफलता प्राप्त की है।

Pregnant women का खास ख्याल

कोविड महामारी के कारण दुनिया भर में स्वास्थ्य आपातकाल है। इस स्थिति में देश में हर प्रेग्नेंट महिलाओं (Pregnant women) का अतिरिक्त ख्याल रखना जरूरी है। ऐसे समय में प्रेग्नेंसी से पहले और बाद में महिलाओं की अच्छी स्वास्थ्य के लिए सरकार ने खास तरह की व्यवस्था भी दी है। जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान कोरोना हुआ है, उनका अधिकार है कि उन्हें उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवा मिले।

दुनिया भर में बच्चा जन्म देने के दौरान रोजाना करीब 830 महिलाओ की मौत हो  जाती है। और जिस कारन उनकी मौत होती है उनसे बचा जा सकता है। हालांकि ...

Delivery के वक्त रखें इन बातों का ध्यान

कोरोना महामारी को देखते हुए प्रेग्नेंट महिलाओं को बिना किसी कारण घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है। आपको बता दें, वर्ष 2005 में जननी सुरक्षा योजना की शुरुआत की गई। अप्रैल 2019 से मार्च 2020 में प्रदेश में लगभग 2585170 महिलाओं को इस योजना का लाभ मिल चुका है।

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संस्थागत प्रसव (Institutional delivery) में यदि प्रसव (Delivery) के दौरान जच्चा-बच्चा को कोई दिक्कत आती है तो उसे आसानी से संभाला जा सकता है। 48 घंटे तक अस्पताल में रोककर पूरी निगरानी की जाती है। और जरूरी टीके की सुविधा भी दी जाती है। यह जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम का हिस्सा है।

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