‘इतना सन्नाटा क्यों है भाई ?’ फ़िल्म शोले के इस डायलॉग को अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता की ऐसी हुई थी मौत  

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बॉलीवुड के एके हंगल फिल्मों में नहीं आना चाहते थे लेकिन हिंदी सिनेमा के इतिहास में उनका योगदान आज भी दर्द है, लेकिन एक वक्त था जब उसी इंडस्ट्री ने हंगल साहब का साथ छोड़ दिया जब वो आर्थिक रूप से कमजोर हो गए। या यूँ कहें की ग्लैमर इंडस्ट्री का यही काला सच है। यहां लोग तभी तक आपको सिर-आंखों पर बिठाते हैं जब तक आपके पास नाम है पैसा है जब आपके पास यह दोनों नहीं है तो आपको अर्श से फर्श पर फेंकने में देर नहीं लगाते हैं। ऐसा ही कुछ एके हंगल के साथ भी हुआ।

पद्म भूषण से सम्मानित एक्टर एके हंगल को अपने अंतिम दिनों में एक छोटे से कमरे में अपनी जिंदगी गुजारनी पड़ी। आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन वो 95 साल की उम्र में अपने बेटे के साथ खंडहर जैसे घर में रह रहे थे। जिस एके हंगल ने हिंदी सिनेमा में इतिहास के नए पन्ने जोड़े उसी को एक ऐसा दौर देखना पड़ा जो किसी की भी रूह कंपा दे। उन्हें ऐसी दर्दनाक मौत मिली जिसके बारे में हम सोच भी नहीं सकते हैं|

 

एके हंगल नें ‘शोले’, ‘बावर्ची’, ‘नमक हराम’, ‘मंजिल’ और ‘शौकीन’ जैसी हिट फिल्मों में काम किया। उनकी जिंदगी में एक ऐसा वक्त आया जब उनके बाद मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए भी पैसे नहीं थे की वो दवाई ले सकें। हालांकि फिल्म इंडस्ट्री से अमिताभ बच्चन और करण जौहर जैसी कई हस्तियों ने एके हंगल की आर्थिक रूप से मदद की, लेकिन तब जब उन्हें हंगल की हालत के बारे में पता चला यानि उससे पहले किसी ने भी उनके बारे में सोचने की कोशिश भी नहीं की।

 

एके हंगल एक बार अपने घर में ही बाथरूम में फिसलकर गिर गए जिसके बाद उनकी जांघ की हड्डी टूट गई और पीठ में भी चोट आई। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया सर्जरी के लिए लेकिन छाती और सांस लेने में तकलीफ के चलते सर्जरी नहीं की जा सकी।हालत और बदतर होती चली गई और फिर हंगल साहब को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रख दिया गया। धीरे-धीरे उनके फेंफड़ों ने भी काम करना बंद कर दिया और फिर एक दिन वो इस दुनिया से चल बसे।

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