समलैंगिकता पर क्यों बंटी है दुनिया, कहीं मौत, तो…

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नई दिल्ली। भारत में दो व्यस्क लोगों के बीच समलैंगिक संबंध अब अपराध नहीं हैं। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने दो व्यस्कों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अपराध मानने वाली धारा 377 को खत्म कर दिया है। बेंच ने कहा कि समाज को व्‍यक्तियों से अलग नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि धारा 377 अतार्किक और मनमानी धारा है और समुदाय को भी समान अधिकार है।आपको बता दें कि समलैंगिकता पर कुछ देशों में मौत की सजा तक सुनाई जाती है।सुडान, ईरान, सऊदी अरब, यमन में समलैंगिक रिश्ता बनाने के लिए मौत की सजा दी जाती है। साथ ही सोमालिया और नाइजीरिया के कुछ हिस्सों में भी इसके लिए मौत की सजा का प्रावधान है। दुनिया में मात्र कुल 13 देश ऐसे हैं, जहां गे सेक्स को लेकर मौत की सजा देने का प्रावधान है।

अफगानिस्तान, पाकिस्तान, कतर में भी मौत की सजा का प्रावधान है, लेकिन इसे लागू नहीं किया जाता है। इंडोनेशिया सहित कुछ देशों में गे सेक्स के लिए कोड़े मारने की सजा दी जाती है। वहीं अन्य देशों में भी इसे अपराध की श्रेणी में रखा गया है और जेल की सजा दी जाती है।

कुछ देशों में समलैंगिकता को मान्यता दी गई है जैसेबेल्जियम, कनाडा, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, नॉर्वे, स्वीडन, आइसलैंड, पुर्तगाल, अर्जेंटीना, डेनमार्क, उरुग्वे, न्यूजीलैंड, फ्रांस, ब्राजील, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, लग्जमबर्ग, फिनलैंड, आयरलैंड, ग्रीनलैंड, कोलंबिया, जर्मनी, माल्टा।

आपको बता दें कि नीदरलैंड ने सबसे पहले दिसंबर 2000 में समलैंगिक शादियों को कानूनी तौर से सही करार दिया था। 2015 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक शादियों को वैध करार दिया था। हालांकि, 2001 तक 57 फीसदी अमेरिकी लोग इसका विरोध लेकिन समय बीतने के साथ ही 2017 में 62 फीसदी अमेरिकी इसका समर्थन करने लगे।

वहीं, दुनिया के 26 देश ऐसे हैं जो समलैंगिकता को कानूनन सही करार दे चुके हैं. पिछले साल ही ऑस्ट्रेलिया की संसद ने भारी बहुमत से इसे मान्यता दी थी. ऑस्ट्रेलिया के 150 सदस्यों के संसद में सिर्फ 4 सदस्यों ने समलैंगिक शादियों के खिलाफ वोट किया था.

 

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