महिला वोटर्स के लिए ‘गुलाबी घोषणापत्र’ क्यों ? पढ़ें ये खबर

UP से होकर जाता है दिल्ली की सत्ता का रास्ता

UP का विधानसभा चुनाव भले ही एक राज्य में लड़ा जा रहा है, लेकिन यहां की जीत अक्सर लोकसभा की दावेदारी के रास्ते को प्रशस्त करती है. ऐसे में क्षेत्रीय से लेकर राष्ट्रीय दल तक कोई भी कोर कसर छोड़ना नहीं चाहता है. इसी के चलते जहां BJP और सपा छोटे-छोटे जातिगत दलों के साथ गठबंधन बनाने में जुटे हुए हैं. जिससे विशेष समुदायों से जुड़े वोट उनकी झोली में गिरें. वहीं कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी ने औरतों को अपनी तरफ करने का मन बना लिया है. इस बार उन्होंने अपने घोषणापत्र को गुलाबी घोषणापत्र का नाम दिया है.

बड़े दांव से बनाया खेलने का मन

सपा-बसपा के पुराने यादव-दलित फॉर्मूले की तुलना में कम से कम रणनीति के स्तर पर यह घोषणापत्र कागजों पर तो ज्यादा मजबूत नज़र आता है. लेकिन कांग्रेस जो उत्तर प्रदेश में खुद के लिए जमीन तलाश रही है, जिसका वोटर लगातार घटता रहा है और दूसरे दलों में मिलता रहा है. कांग्रेस राज्य में खुद को दोबारा स्थापित करने के लिए इस दांव को खेलने का मन बना चुकी है, वैसे भी आधी वोटर तो महिलाएं ही हैं.

आखिर महिला उम्मीदवार को तरजीह क्यों

एक महिला उम्मीदवार को महिलाएं इसलिए वोट करेंगी क्योंकि उन्हें इस बात का भरोसा रहता है कि महिलाओं की तकलीफ किसी पुरुष से ज्यादा एक महिला बेहतर समझ सकती है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा महिला सांसद तृणमूल कांग्रेस और बीजू जनता दल से चुन कर आई हैं. दोनो ही दलों ने चुनाव में बड़ी संख्या में महिला उम्मीदवार खड़े किए थे. महिला सांसद या विधायक, महिलाओं से जुड़ी बात बेहतर तरीके से रख सकती हैं, इस सवाल पर करीब 47 फीसद महिलाओं ने सहमति दर्ज की है.

यह भी पढ़ें- हजारों साल पहले बने काशी विश्वनाथ मंदिर के बनने और टूटने की दिलचस्प कहानी

(Puridunia हिन्दी, अंग्रेज़ी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब  पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं)…

Related Articles