अली और बजरंगबली पर ही बार-बार क्यों मुड़ जाती है सियासत की गली

लखनऊ: लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण का मतदान हो चूका है चुनाव के करीब आते ही राजनीतिक दलों की बयानबाजी अपने चरण सीमा पर होती है ऐसे में उन्हें धार्मिक आहत होने का भी ख्याल नहीं रहता, सियासत की गरमी में राजनीतिक दलों ने अली और बजरंग बली को भी झोक दिया. इससे पहले भी राजनीती में अली और बजरंग बली का मुद्दा उठा हुआ था और तब मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधान सभा चुनाव चल रहें थे, लेकिन इस बार इस मुद्दे पर राजनीति करने के लिए अब समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और रामपुर से महागठबंधन प्रत्याशी आजम खान भी कूद पड़े हैं. एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने ‘बजरंग अली’ का नया नारा दे डाला.

उत्तर प्रदेश के रामपुर लोकसभा सीट के लिए चुनाव प्रचार करने आए आजम खान ने एक जनसभा में लोगों से ‘बजरंगअली’ का नारा लगवाया. उन्होंने कहा, “आपस के रिश्ते को अच्छा करो, अली और बजरंग में झगड़ा मत कराओ, मैं तो एक नाम दिए देता हूं बजरंग अली.”

सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए आजम ने आगे कहा, “मेरा तो दिल कमजोर नहीं हुआ. योगी जी. आपने कहा था कि हनुमान जी दलित थे. फिर किसी ने कहा हनुमान जी ठाकुर थे. फिर पता चला कि वे ठाकुर नहीं थे, वे जाट थे. फिर किसी ने कहा कि वे हिंदुस्तान के थे ही नहीं, वे तो श्रीलंका के थे. एक मुसलमान एमएलसी ने कहा कि हनुमान जी मुसलमान थे. तब जाकर झगड़ा ही खत्म हो गया. अब हम अली और बजरंग एक हैं.”

इसके बाद उन्होंने कहा “बजरंग अली तोड़ दो दुश्मन की नली, बजरंग अली ले लो जालिमों की बलि.”

बता दें कि इससे पहले चुनाव आयोग ने मेरठ में एक रैली के दौरान ‘‘अली’’ और ‘‘बजरंग अली’’ वाली टिप्पणी करने को लेकर गुरूवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कारण बताओ नोटिस जारी किया. आयोग का मानना है कि प्रथम दृष्टया योगी ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है. आयोग ने उनसे शुक्रवार की शाम तक जवाब देने को कहा है.

बता दें कि योगी ने लोकसभा चुनावों की तुलना इस्लाम में अहम शख्सियत ‘अली’ और हिंदू देवता ‘बजरंगबली’ के बीच मुकाबले से की थी. बीजेपी नेता ने कहा था, ‘‘अगर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को अली पर विश्वास है तो हमें भी बजरंग बली पर विश्वास है.’’

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