नींबू के पेड़ के नीचे भू-समाधि में क्यों रखा गया महंत नरेंद्र गिरि का पार्थिव शरीर?

प्रयागराज: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के पार्थिव शरीर को बुधवार को बाघमबाड़ी मठ के परिसर में एक ‘भू-समाधि’ में रखा गया, इस दौरान सैकड़ों संतों और संतों की उपस्थिति में मंत्रों का जाप किया गया। समाधि को एक नींबू के पेड़ के नीचे रखा गया था, जैसा कि मृतक संत ने चाहा था।

मालूम हो कि जिस नींबू के पेड़ के नीचे नरेंद्र गिरि को समाधि दी गई है वो पेड़ नरेंद्र गिरि ने ही मठ में लगाया था। जिस वक्त नरेंद्र गिरि को समाधि दी गई, उस वक्त माहौल एकदम गमगीन था। कई साधुगण रोते हुए दिखाई दिए। नींबू के पेड़ के नीचे एक गड्डाखोदा गया और वहां पर एक छोटा सा कमरा सा बनाया गया, उसी में नरेंद्र गिरि को समाधि दी गई। मालूम हो कि समाधि सिद्धासन अवस्था में दी जाती है।

आपको बता दें कि महंत नरेंद्र गिरि ने सोमवार की शाम को कथित तौर पर आत्महत्या करके अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। उन्हें समाधि में झूठ बोलने की स्थिति में रखा गया, न कि बैठने की स्थिति में, जैसा कि प्रथा है। इससे पहले, महंत के पार्थिव शरीर को अंतिम पवित्र स्नान के लिए एक जुलूस में संगम ले जाया गया। द्रष्टा को अंतिम दर्शन देने के लिए मार्ग पर भारी भीड़ उमड़ी।

पांच डॉक्टरों के नामित पैनल ने बुधवार सुबह नरेंद्र गिरि का शव परीक्षण भी किया। रिपोर्ट को सील कर दिया गया है और विसरा को आगे की जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है। हालांकि सूत्रों ने बताया कि डॉक्टरों के पैनल ने फांसी लगाकर मौत की पुष्टि की थी।

 

 

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