उत्‍तराखंड में क्यों मची तबाही? 2013 त्रासदी के गवाहों ने बताई बड़ी वजह

उत्‍तराखंड: साल 2013 की तरह एक बार फिर से उत्‍तराखंड (Uttarakhand) में तबाही मच गई है। इस बार उत्‍तराखंड चमोली जिले में आज रविवार को ग्‍लेशियर टूटने की वजह से 7 लोगो के शव बरामद हुए है जबकि 100 से ज्‍यादा लोगों के मारे जाने की संभावना है। इस तबाही में 6 लोग घायल और 170 लोग लापता हो गए है। चमोली जिले में आज हुए इस हादसे में चल रहा पावर प्राजेक्‍ट बर्बाद हो गया है। आज की तबाही को लेकर उत्‍तराखंड (Uttarakhand) में 2013 को हुई त्रासदी के साक्षी रह चुके लोगो ने आकलन करना शुरू कर दिया है।

इस तबाही को लेकर उत्‍तराखंड में ईको टास्क फोर्स के पूर्व कमांडेंट ऑफिसर कर्नल हरिराज सिंह राणा ने मीडिया से बातचीत में बताया है कि केदारनाथ में 2013 को आए जल परवाह के हिसाब से इस तबाही में जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। इस बार की घटना में मौतों के आंकड़े बढ़ने की संभावना है और लापता अधिक लोग हो चुके हुए। चमोली जिले में आज जो हुआ है ये उत्‍तराखंड में कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन इसका तबाही में बदल जाना देश के लिए और यहां के लोगो के लिए बहुत बड़ी बात है।

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इस वजह से हादसे में होता है नुकसान

हरिराज सिंह राणा ने बताया कि इस बड़ी घटना की बस दो वजह हो सकती है। सबसे पहली बात ये घटना तब होती है जब नदी के फ्लड एरिया में अतिक्रमण और निर्माण कार्य होता है। दूसरी वजह यह है कि 2013 की तबाही के बाद से इसका कोई सबक नहीं लिया गया। इसका मतलब यह है कि इस इलाके में जहां नदी है उसी के किनारे पर लोगो ने घर और होटल बहुत कुछ बना रखा है इस वजह से जब तबाही आती है तो आस-पास की सभी लोगो को बहा ले जाती है। अगर नियमों का पालन करते हुए नदी के दोनों तरफ पांच सौ मीटर की दुरी छोड़ कर बनाते तो ग्‍लेशियर के टूटने के बाद से पानी की चपेट में इतने लोग नहीं आते।

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