अब आएंगे अच्छे दिन? इन उद्योगपतियों ने उठाया सबसे बड़ा कदम

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भारत में शुद्ध पेयजल की समस्या से आप भालिभांति परिचित हैंइस समस्या से जूझ रहे तकरीबन 16 करोड़ भारतीय इससे उबरने के हर सफल प्रयास में जूते हैं। हर दिन हर पल उन्हे यह चिंता सताया करती है कि क्या कल प्यास बुझाने के लिए पानी नसीब होगा या नहीं। सरकार भी इस समस्या से उबरने के लिए काफी सफल प्रयास भी कर रही है। अगर बात करें पानी के आंकड़ों में गिरावट की तो सरकार के मुताबिक 2001 से 2011 के बच प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता बेहद तेज़ी से गिरी और 1.8 मिलियन लीटर से गिरकर 1.5 लीटर पहुंच गई। सरकार के अलावा कई बड़े उद्योगपतियों ने भी इस परिस्थिति से निकालने के लिए कई कई आधुनिक तकनीकी उत्पाद और सुविधाएं लॉन्च कीं है

अब आएंगे अच्छे दिन? इन उद्योगपतियों ने उठाया सबसे बड़ा कदम…

शुद्ध पेय जल की समस्या…

अगर हम बात करें भारत में पीने के पानी की समस्या की तो तो यहाँ स्थिति बाद से बत्तर है। कई सर्वे, कई रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में अब भी पीने के पानी का स्तर लगातार कम होता जा रहा है। इस  स्थिति को देखते हुए सरकार को आशंका है कि और 2050 तक प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता घटकर क्रमशः 1.3 मिलियन लीटर और 1.1 लीटर पहुंच जाएगी।

उद्योगपतियों के कदम….

कई बड़े उद्योगपतियों ने देश को इस बड़ी चुनौती से उबारने के लिए कई आधुनिक तकनीकी उत्पाद और सुविधाएं लॉन्च कीं। आईओटी (इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स) से लेकर सोलर पावर तक, योर स्टोरी ने 6 प्रमुख स्टार्टअप्स की लिस्ट तैयार की है, जो तकनीक का सहारा लेते हुए आम जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं।

ये है पूरी लिस्ट….

स्वजल वॉटर एटीएम
आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले अद्वैत कुमार और विभा त्रिपाठी ने 2014 में स्वजल वॉटर एटीएम शुरुआत की थी। यह एक सोलर प्यूरीफ़िकेशन सिस्टम है, जोकि 9 स्टेप्स में बंटी हुई हैं। मेंटेनेंस के लिए यह सिस्टम आईओटी आधारित क्लाइड मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल करता है। यह सौर ऊर्जा से चलता है। यह विशेष रूप से उन इलाकों में पेयजल उपलब्ध करा रहा है, जहां पर बिजली की पर्याप्त सप्लाई की भी समस्या है। यह सिस्टम ऑनलाइन माध्यमों से भी भुगतान स्वीकार करता है। उपभोक्ता सिक्कों के माध्यम से भुगतान करके भी इस सिस्टम की सुविधाएं ले सकते हैं।

उरावु
एक्स प्राइज़ (XPRIZE) में सोशल ऑन्त्रप्रन्योरशिप चैलेंज में नामांकित हो चुके उरावु 2017 में हैदराबाद के रहने वाले स्वप्निल श्रीवास्तव, संदीप नुटक्की और वेंकटेशन आर ने सौर ऊर्जा से संचालित होने वाली एक डिवाइस विकसित की। यह डिवाइस हीड्रोस्कोपिक मटीरियल की मदद से भाप को इकट्ठा करती है। इस डिवाइस में रात के समय पानी को एकत्रित किया जाता है और दिन के समय सौर ऊर्जा की मदद से पानी को गर्म किया जाता है। इसके बाद कन्डेंसर की मदद से पानी के तापमान को सामान्य किया जाता है। उपभोक्ता पाइप के ज़रिए पीने का पानी निकाल सकते हैं। यह प्रक्रिया, एक प्राकृतिक फ़िल्टर की तरह ही काम करती है। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस बताई गई प्रक्रिया के माध्यम से रोज़ाना 50 लीटर तक पीने योग्य पानी तैयार कर सकती है।

ओसीईओ
विक्रम गुलेचा, महेंद्र दंतेवाड़िया, हसमुख गुलेचा और राजीव कृष्णा ने 2017 में इस स्टार्टअप की शुरुआत की थी। बेंगलुरु आधारित स्टार्टअप ओसीईओ एक आईओटी आधारित स्मार्ट वॉटर प्यूरिफ़ायर, जो उपभोक्ताओं से प्रति लीटर पानी के हिसाब से पैसे चार्ज करता है। यह प्यूरिफ़ायर उपभोक्ता द्वारा बताई गई लोकेशन पर लगा दिया जाता है और वे वेब ऐप्लिकेशन या मोबाइल के माध्यम से प्यूरिफ़ायर रीचार्ज करा सकते हैं। इसका सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि इस सिस्टम में उपभोक्ताओं को मेंटेनेंस की क़ीमत या फिर मशीन के लिए भुगतान नहीं करना पड़ता। उपभोक्ता उतनी ही क़ीमत चुकाता है, जितने का उसने पानी इस्तेमाल किया हो।

पीरामल सर्वजल
2008 में आनंद शाह ने सर्वजल सोशल एंटरप्राइज़ की शुरुआत की थी, जो सौर ऊर्जा से संचालित क्लाउट-कनेक्टेड वॉटर एटीएम के ज़रिए पिछले इलाकों में पीने के पानी की सप्लाई का दावा करता है। कंपनी ने पिरामल समूह से सीड फ़ंडिंग की थी। उपभोक्ताओं को इस्तेमाल के हिसाब से भुगतान करना होता है और भुगतान के लिए वे सिक्कों या फिर डेबिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस एटीएम के साथ रिमोट मॉनिटरिंग तकनीक भी लगी हुई है। इस एटीएम सर्विस का प्रबंधन फ़्रैंचाइज़ी मॉडल के माध्यम से किया जाता है। सर्वजल ने देश के 16 राज्यों में पीने के पानी के लिए 1 हज़ार से भी अधिक स्टेशन्स स्थापित किए हैं।

वाहवॉटर वेंडिंग मशीन
2016 में विनीत वत्स ने लखनऊ से वाह की शुरुआत की थी। उनका उद्देश्य था कि पीने के शुद्ध पानी को सस्ती से सस्ती क़ीमत पर आम जनता तक पहुंचाया जाए। वाटर वॉटर वेंडिंग मशीन मात्र 2 रुपए में रीसायकल होने वाले पेपर कप में 250 मिली. शुद्ध ठंडा पानी उपलब्ध कराती है। मीडिया रिपोर्ट्स भी कहती हैं कि हर वॉटर एटीएम पर इस्तेमाल होने वाले पेपर कप, फ़ूड-ग्रेड रीयसायक्लेबल पेपर से तैयार किए हैं।

अमृत
आईआईटी मद्रास के शोधार्थियों के एक समूह ने प्रोफ़ेसर टी. प्रदीप की अध्यक्षता में 2013 में अमृत की शुरुआत की थी। अमृत नैनोपार्टिकल आधारित तकनीक पर काम करता है और यह भारत में आर्सेनिक से मुक्त पानी उपलब्ध कराने का काम कर रहा है। अमृत (आर्सेनिक ऐंड मेटल रीमूवल बाय इंडियन टेक्नॉलजी) पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर इस्तेमाल हो रहा है।

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