इस तकनीक से भारत बनेगा एशिया का गुरु

नई दिल्ली: भारत ने अपने नाविकों और मछुआरों के साथ-साथ अपने पडोसी देशों को समुद्री खतरों से बचाने लिए एक रियल-टाइम वेसल ट्रैकिंग सिस्टम लॉन्च किया है। जिस का नाम सागर मंथन है। इस के लांच के समय देश को दिए अपने बयांन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कॉर्गो की ढुलाई लिए सडकों से बेहतर जलमार्ग हैं जो ट्रैफिक फ्री होने के साथ-साथ पर्यावरण के नज़रिये से भी सड़कों से बेहतर हैं।

भारत के नए जलमार्गों को विकसित करने के सपने को पूरा करने में ये तकनीक मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने आगे कहा कि ईस्टर्न वाटर वे ट्रांसपोर्ट ग्रिड जो भारत को नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार और भूटान के साथ जोड़ता है इस तकनीक से उस को भी बेहतर करने की तैयारी चल रही है।

डीजी शिपिंग ने इसे किया है तैयार

सूत्रों की मानें तो ये दुनिया में कहीं भी भी मौजूद भारतीय कार्गो शिप्स को ट्रैक कर सकता है। इस के साथ-साथ इससे देश को आपातकालीन मामलों से निपटने में भी बड़ी मदद मिलेगी । यही नहीं अपनी तमाम खूबिओं के साथ-साथ यह  देश के एक हज़ार किलोमीटर के समुद्री क्षेत्र में मौजूद किसी भी विदेशी जहाज़ को ट्रैक करने में सक्षम है  जिस से आइंदा भविष्य में में 2008 जैसी घटनाओं को भी रोकने में मदद मिलेगी।

ट्रैकिंग सिस्टम को भारत इन देशों के साथ करेगा साझा श्रीलंका और मालदीव जैसे पडोसी देशों के साथ साझा करेगा। यह परियोजना  राष्ट्रीय जलमार्ग -1 और राष्ट्रीय जलमार्ग -2 के बीच एक सहज संपर्क बनाने के मकसद से शुरू की गयी थी । आने वाले वक़्त में यह तकनीक भारत के बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच  ट्रेड को  और बेहतर करेगी।

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