क्या महिला बनेगी इस बार उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष

Smriti-Irani1उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी मिशन 2017 के लिए पार्टी की पतवार किस मांझी को दे इस बात को लेकर पसोपेश में है। आलाकमान किसी करिश्माई नेता की तलाश में है। जिसके ग्लैमर और सांगठनिक क्षमता से पार्टी एक होकर चले। इस कयासबाजी में केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम सबसे ऊपर है।

स्मृति ईरानी के नाम की पैरवी करने वालों का कहना है कि उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया तो सपा, कांग्रेस और बसपा को करारा जवाब देना आसान होगा।

कहा यह भी जा रहा है कि यदि स्मृति ईरानी के नाम पर सहमति न बनी तो पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और केंद्रीय मंत्री उमा भारती को भी यूपी में किसी नयी व अलग जिम्मेदारी में लाया जा सकता है। इसी के मद्देनजर राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह अपना जन्मदिन इस बार यूपी में मनाएंगे।

KALYAN_SINGH_1773675fप्रकटतः तो यह दिख रहा है कि यूपी में अपनों के बीच से किसी नये अध्यक्ष के नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है लेकिन असली रोड़ा पार्टी आलाकमान की ओर से है। बिहार की दुर्गति देखने के बाद आलाकमान कोई रिस्क लेने के मूड में दिख नहीं रहा है।

कहा यह भी जा रहा है कि वर्तमान अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी को नया कार्यकाल मिलने वाला नहीं है लेकिन यह बाजपेयी विरोधी खेमे की कयासबाजी ही है। अंदरखाने बाजपेयी की पकड़ मजबूत बतायी जा रही है। यह कहा जा रहा है कि उन्हें अमित शाह का विश्वास हासिल है।

प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में वैसे तो एक दर्जन लोग हैं,  लेकिन हाईकमान मिशन 2017 के लिए किसी को भी दांव लगाने लायक नहीं मान पा रहा है। ऐसे में एक बार फिर पुराने चावल आजमाने की तैयारी है। जो पहले भी प्रदेश में भाजपा को सत्ता में ला चुके हैं और जिनकी सांगठनिक पकड़ पर भी सवाल नहीं है। लेकिन प्रदेश की राजनीति की पीछे छोड़कर बहुत आगे निकल चुका कोई कद्दावर नेता क्यों कर प्रदेश की राजनीति में लौटना चाहेगा, ये यक्ष प्रश्न है।

uma-bhartiअध्यक्ष पद के लिए दो बार के सांसद व केंद्र सरकार में राज्यमंत्री राम शंकर कठेरिया का नाम भी बार बार उछाला जा रहा है। इसके अलावा कभी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व लखनऊ के मेयर डा. दिनेश शर्मा के नाम को लेकर चर्चा होती है तो कभी केंद्र में मंत्री डा. महेश शर्मा को लेकर। स्वतंत्रदेव सिंह और डा. धर्मपाल सिंह भी इस दौड़ में शामिल हैं।

हालांकि अलग अलग खेमों से चलाये जा रहे नामों के हिसाब से सांसद केशव मौर्य, रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, कैबिनेट मंत्री संतोष गंगवार, राष्ट्रीय सचिव महेन्द्र सिंह, सांसद वरुण गांधी के  नाम भी अध्यक्ष की रेस में हैं।

भाजपा हाईकमान की दिक्कत यह है कि वह अभी तय नहीं कर पा रहा है कि सूबे के अगले विधानसभा चुनाव में सोशल इंजीनियरिंग के किस चेहरे को फिट करे। शायद यही वजह है कि कुछ ऐसे नेता भी जो अपने जिले में भी कोई खास दखल नहीं रखते, पर अध्यक्ष पद की रेस में जुट गये हैं।

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