महिला शिक्षा मित्रों ने सिर मुंडवाकर किया विरोध, कहा- सीएम योगी संत नहीं स्वार्थी व्यक्ति

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लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट के शिक्षक पद पर समायोजन रद्द करने के फैसले के बुधवार को एक साल पूरा होने पर शिक्षामित्रों ने काला दिवस मनाया। इस दौरान प्रदेश सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए नाराज महिला शिक्षामित्रों ने अपना सिर मुंडवा दिया। वहीं पुरुष शिक्षामित्रों ने भी सिर मुंडवाकर और अपना जनेऊ उतारकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। शिक्षामित्रों ने आरोप लगाया कि केंद्र और योगी सरकार ने उनकी अनदेखी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया था समायोजन

शिक्षामित्रों ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर बुधावार को लखनऊ के इकोगार्डन में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। गौरतलब हो कि शिक्षामित्र समायोजन के संबंध में 25 जुलाई 2017 को राज्य सरकार, बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा दायर सिविल अपील पर सर्वोच्च न्यायालय ने 1.70 लाख शिक्षा मित्रों का समायोजन निरस्त कर दिया गया था। जिसके बाद शिक्षामित्रों में लगातार रोष व्याप्त है। इनकी मांग है कि शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाया जाए और जो शिक्षामित्र टीईटी उत्तीर्ण हैं, उन्हें बिना परीक्षा दिए ही नियुक्ति दी जाए।

योगी ना ही संत और ना ही क्षत्रिय

अपनी मांगों की अनसुनी से नाराज शिक्षामित्र का गुस्सा मुख्यमंत्री पर जमकर बरसा। प्रदर्शन में शामिल हुईं महिला शिक्षामित्रों ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ क्षत्रिय नहीं हैं, उनकी नसों में क्षत्रिय का खून नहीं है, और न ही वह संत है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि सीएम ने अपने स्वार्थ के लिए परिवार का त्याग किया। महिला ने कहा कि आज हम यहां अपने बच्चों के लिए अपने केशों की तिलांजिल दे रहे हैं। सीएम हमारे और परिवार का दर्द नहीं समझ सकते है। क्योंकि वह अपने स्वार्थ के लिए परिवार को छोड़ चुके हैं।

शिक्षामित्रों के साथ सरकार खेल रही चाणक्य नीति

शिक्षामित्रों ने सरकार पर उपेक्षा और राजनीति करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार उनके मुद्दे पर सिर्फ राजनीति कर रही है। सीएम योगी ने अश्वासन दिया था कि शिक्षामित्रों के हित में काम करेंगे। सरकार ने जो वादें अपने संकल्प पत्र में किए थे, वो आज तक पूरे नहीं हो सके। अब सरकार शिक्षामित्रों को अपनी राजनीति का शिकार बनाते रहे है। इतना ही नहीं मूल विद्घायल भेजने की चाणक्य़ नीति खेल रही है।

सबसे कम वेतन दिया जा रहा

चार सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले एक माह से अपनी इको गार्डन में आंदोलनरत शिक्षामित्रों ने कहा सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया। शित्रामित्रों की मांगों में समायोजन और मानदेय बढ़ाने की मांग की है। इसके अलावा शिक्षामित्रों को अभी 10 हजार रुपए वेतन दिया जा रहा है इसे बढ़ाकर 38 हजार रुपए किए जाने की मांग भी शामिल है। शिक्षामित्रों का कहना है कि सबसे कम वेतन उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों को दी जा रही है।

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