इनका जज्‍बा देख रह जाएंगे हैरान, वर्ल्‍ड लेवल में 5वें नंबर पर आया ये मजदूर

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दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने अपने हैरतअंगेज कारनामे से अपना, अपने माँ बाप का, अपने जिले का और अपने देश का नाम रोशन किया हैदुनिया में लोगों की ऐसी कई रोचक कहानियां हैं जिससे हम प्रभावित होने के साथ-साथ इंस्पायर भी होते हैं। ऐसी ही कहानियों में पश्चिम बंगाल के मालदा में जन्मे 22 वर्षीय रोहिम मोमिन की कहानी शूमार है जो की आज के लोगों के लिए के मिसाल है।

इनका जज्‍बा देख रह जाएंगे हैरान, वर्ल्‍ड लेवल में 5वें नंबर पर आया ये मजदूर

देश के लिए रोहिम 2017 में अबु धाबी में हुई वर्ल्ड स्किल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 59 देशों के प्रतियोगियों के बीच रोहिम ने 5वां भी स्थान हासिल किया।

रोहित की कहानी

रोहिम मोमिन अनाथ हैं और उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा बीच में ही छोड़ दी थी। वह अपने परिवार में एकमात्र कमाने वाली इकाई थे। रोहिम बेहतर मौक़ों की तलाश में अपने गांव से दिल्ली आ गए और राजधानी आकर निर्माण कार्य करने वाले श्रमिकों की जमात का हिस्सा बन गए। दरअसल, उनके पिता की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई और इसके बाद उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। इस दौरान रोहिम 11वीं कक्षा में पढ़ रहे थे। 2014 में रोहिम दिल्ली आए और कन्सट्रक्शन के काम से जुड़ गए।

बचपन में उनका ख़्वाब शिक्षक बनने का था। उन्होंने सूत्रों को बताया कि अपने स्कूल में वह अव्वल थे और उन्हें पढ़ाई में बेहद दिलचस्पी थी, लेकिन ज़िंदगी ख़्वाबों या इच्छाओं की तर्ज़ पर नहीं चलती और रोहित को भी जिम्मेदारियों के चलते कन्सट्रक्शन के सेक्टर में काम करने के लिए उतरना पड़ा। रोहिम बताते हैं की उनके गांव में एक ठेकेदार था, जो गांव से लोगों को मजदूरी करने के लिए दिल्ली ले जाता था। उन्हें भी किसी ने उस ठेकेदार से मिलाया और इसके बाद वें दिल्ली आ गए। उनके गांव की 80 प्रतिशत कामगार आबादी गांव के बाहर अलग-अलग शहरों में कन्सट्रक्शन के क्षेत्र में ही काम करती है।

रोहिम अपने परिवार की माली हालत को बेहतर करना चाहते थे और अपनी तीन छोटी बहनों का भविष्य सुरक्षित करना चाहते थे। इस चाहत ने उनके अंदर प्रेरणा भरी और वह शारीरिक श्रम के अलावा दूसरे मौक़ों और कामों में भी हाथ आज़माने लगे। रोहिम ने तय किया कि वह व्यवस्थित प्रशिक्षण के माध्यम से अपनी क्षमताओं को विकसित करेंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। रोहिम ने अपनी इस चाहत को हक़ीकत में तब्दील कर दिखाया

कुछ ही दिनों में उनको एहसास हुआ कि ईंट इत्यादि की चुनाई करने वाले मजदूरों को अधिक पैसा मिलता है और इसके बाद उन्होंने एक साल से भी कम वक़्त में यह काम सीख लिया। एक दिन उन्होंने कुछ मजदूरों को चुनाई की एक प्रतियोगिता के बारे में बात करते हुए सुना, जिसमें एक निर्धारित वक़्त में कन्सट्रक्शन का निर्धारित काम पूरा करने वाले को इनाम मिलता है। रोहिम ने भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और दिल्ली-एनसीआर के 18 प्रतियोगियों के बीच में उन्हें दूसरा स्थान मिला।

रोहिम ने सूत्रों को बताया कि कंपनी स्तर पर 4 घंटों में एक एच-शेप की एक मीटर लंबी दीवार बनानी होती है। यह काम काफ़ी बारीक़ होता है और इसमें बहुत मेहनत की ज़रूरत होती है। उन्हें बीच-बीच में काफ़ी प्यास भी लगी, लेकिन समय बचाने के लिए उन्होंने पानी तक नहीं पिया।

कंपनी स्तर की इस स्तर की प्रतियोगिता के बाद रोहिम ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभागिता दर्ज कराई। 2015 में नैशनल स्किल्स कॉम्पिटिशन में उन्हें दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। इसके बाद उनका चयन वर्ल्ड स्किल्स कॉम्पिटिशन के लिए हुआ। इस प्रतियोगिता के लिए रोहिम ने सितंबर 2016 से लेकर अक्टूबर 2017 तक पुणे में सीआरईडीएआई (CREDAI) के ‘कुशल’ प्रोग्राम के अंतर्गत प्रशिक्षण लिया।

अबु धाबी में हुए वर्ल्ड स्किल्स कॉम्पिटिशन की ऑर्गनाइज़िंग कमिटी ने बताया कि कनसट्रक्शन के दो प्रोजेक्ट कभी भी एक तरह के नहीं हो सकते और इस लिए ईंटों आदि की चुनाई करने वाले को हमेशा नई चुनौती के लिए तैयार रहना पड़ता है। इस प्रतियोगिता में रोहिम का सामना 59 देशों के प्रशिक्षित कारीगरों से था, जहां पर उन्हें ड्राइंग्स के आधार पर अपनी समझ तैयार करनी थी और फिर एक विश्व-स्तरीय बिल्डिंग बनानी थी।

रोहिम बताते हैं कि अबु धाबी में सब कुछ काफ़ी अलग था। वह पर इस्तेमाल होने वाली मोटर, बालू और तकनीकें, उनके लिए सभी कुछ पूरी तरह से नया था। वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता में रोहिम को मेडालियन ऑफ़ एक्सीलेंस का ख़िताब मिला और प्रतियोगिता में उन्होंने 5वां स्थान प्राप्त किया। इस परिणाम के बाद रोहिम काफ़ी निराश हुए और रोए भी क्योंकि उन्होंने इस प्रतियोगिता के लिए काफ़ी तैयारी की थी और इसके बाद भी वह इसमें जीत न सके।

रोहिम ने बताया कि विदेशों में कन्सट्रक्शन के काम के लिए कॉलेजों में वोकेशनल कोर्सेज़ उपलब्ध हैं और वहां के लोग इसे एक अच्छे प्रोफ़ेशन के रूप में देखते हैं। वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता में मिली सफलता के बाद फ़िलहाल रोहिम एटीएस कन्सट्रक्शन्स कंपनी में बतौर असिस्टेंट फ़ोरमैन काम कर कर रहे हैं और साथ ही रोहिम, नैशनल और इंटरनैशनल स्किल्स कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने वालों को प्रशिक्षित भी करते हैं।

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