युवाओं में भी बढ़ रहे स्ट्रोक के मामले

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आगरा। नॉन कम्यूनिकेबिल डिजीज यानि गैर संचारी रोग। बदलती जीवन शैली के कारण यह बीमारी इस कदर बढ़ रही हैं कि मरने वालों के ग्राफ के साथ स्वास्थ विभाग का 80 फीसदी बजट इन बीमारियों पर ही खर्च हो जाता है। हृदय रोग व डायबिटीज जैसे रोगों के बारे में कुछ हद तक जागरूकता बढ़ी है, लेकिन स्ट्रोक के लक्षण और बचाव आदि के बारे में जानने वालों के प्रतिशत बहुत कम है।

हर साल करीब 60 लाख लोग होते हैं शिकार

पता चला है कि दुनिया में 60 लाख लोग हर साल स्ट्रोक से मरते हैं। 13-33 प्रतिशत युवा स्ट्रोक का शिकार हो रहे हैं। चिन्ता की बात यह है कि बदलती जीवन शैली के कारण हर साल यह ग्राफ बढ़ रहा है।

ईशान इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित की गई वर्कशॉप

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मथुरा रोड स्थित ईशान इंजीनियरिंग कॉलेज में गैर संचारी रोग के आगरा को-ऑर्डिनेटर डॉ. पियूष जैन ने अपने व्याख्यान में यह जानकारी दी। उन्‍होंने बताया कि गलत जीवन शैली के कारण पहले 50 वर्ष में होनी वाली बीमारी का शिकार आज 20-25 वर्ष के युवा हो रहे हैं। फायबर रहित पिज्जा बर्गर और कोल्ड ड्रिंग युवाओं के भोजन का विकल्प बन गए हैं। शारीरिक श्रम कम और तनाव बढ़ रहा है। सबसे अधिक चिन्ता स्ट्रोक (लकवा) को लेकर है। इसके बारे में लोग कम जानते हैं। इसका शिकार होने पर या तो जान जाएगी या फिर आप जीवन भर के लिए अपाहिज हो जाएंगे।

छात्रों ने किए तमाम सवाल

डॉ. नीतू चौधरी ने डायबिटीज व हृदय रोग के बारे में जानकारी दी। बच्चों ने अपने जिज्ञासा भरे सवाल भी किए। संचालन कॉलेज के निदेशक डॉ. जीएस श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर निधि जैन व मैनेजिंग ट्रस्टी मंजरी अग्रवाल भी मौजूद थी।

आगरा से शुरू हुआ अभियान पूरी यूपी को कर रहा जागरूक

डॉ. पियूष ने बताया कि गैर संचारी रोगों पर लोगों को जागरूक करने का अभियान आगरा से शुरू हुआ था, जो आज पूरी यूपी में चल रहा है। उद्देश्य स्कूल कॉलेजों में जाकर लोगों को इन बीमारियों के प्रति जागरूक करना है, जिससे इसके बढ़ते ग्राफ को कम किया जा सके। डॉ. पियूष ने बताया कि स्ट्रोक के दौरान लगाया जाने वाला 50 हजार कीमत का इंजेक्शन जिला अस्पताल में फ्री है। इंसुलिन के इंजेक्शन भी फ्री उपलब्ध हैं। जिला अस्पताल में स्ट्रोक रिस्पॉन्स टीम बनी है जो हर वक्त मरीज के लिए उपलब्ध है।

स्ट्रोक के लिए फास्ट कैम्पेन

FAST कैम्पेन यानि स्ट्रोक के लक्षणों के प्रति लोगों को जागरूक करना। इसके नाम में ही सभी जवाब छिपे हैं।

F यानि फेस अचानक चेहरे पर टेढ़ापन होने लगे।

A यानि आर्म (हाथ या पैर) में अचानक कमजोरी महसूस होने लगे।

S यानि स्पीच। बोली में अस्पष्टता

T टाइन यानि इन लक्षणों के के 4 घंटे के अंदर मरीज का सही अस्पताल और सही डॉक्टर के हाथों इलाज जरूरी है।

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