World Blood Donation Day 2021: जानिए क्यों मनाया जाता है Karl Landsteiner की याद में यह दिवस

विश्व रक्तदान दिवस हर साल 14 जून को मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इस दिन को रक्तदान दिवस के रूप में घोषित किया गया है

नई दिल्ली: विश्व रक्तदान दिवस (World Blood Donation Day) हर साल14 जून को मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इस दिन को रक्तदान दिवस के रूप में घोषित किया गया है। रक्तदान तब ही सफल होता है जब एक स्वस्थ व्यक्ति अपनी इच्छा से रक्त दान करता है।

 

 

कार्ल लैंडस्टीनर का जन्मदिन

विश्व रक्तदाता दिवस हर साल 14 जून को दुनिया भर के लोगों द्वारा मनाया जाता है। यह 14 जून, 1868 को कार्ल लैंडस्टीनर (Karl Landsteiner) के जन्मदिन की सालगिरह पर मनाया जाता है। लैंडस्टीनर को एबीओ ब्लड ग्रुप सिस्टम की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

कार्ल लैंडस्टैनर (Karl Landsteiner) ने आस्ट्रिया के एक जीववैज्ञानिक तथा चिकित्सक थे। सन 1900 में उन्होने रक्त के मुख्य समूहों की Blood Groups पहचान की थी।

विश्व रक्त दाता दिवस विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा चिह्नित 11 आधिकारिक वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में से एक है, जिसमें विश्व स्वास्थ्य दिवस, विश्व चागास रोग दिवस, विश्व क्षय रोग दिवस, विश्व टीकाकरण सप्ताह, विश्व रोगी सुरक्षा दिवस, विश्व मलेरिया दिवस, विश्व तंबाकू निषेध दिवस, विश्व हेपेटाइटिस दिवस, विश्व रोगाणुरोधी जागरूकता सप्ताह और विश्व एड्स दिवस शामिल हैं।

2004 में स्थापित इस दिवस का उद्देश्य सुरक्षित रक्त रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना और रक्तदाताओं के सुरक्षित जीवन रक्षक रक्त के दान करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करते हुए आभार व्यक्त करना है।

इस दिवस का महत्व

नियोजित उपचार और Immediate intervention के लिए रक्त (Blood) एक आवश्यक संसाधन है। यह उन रोगियों के लिए मददगार है जो लंबे समय तक जीने और जीवन की उच्च गुणवत्ता के साथ जीवन के लिए खतरनाक स्थितियों से पीड़ित हैं। यह जटिल चिकित्सा और शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं का समर्थन करता है।

रक्त दाता की सुरक्षा

दाता से रक्त लेने के पहले उसके स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रक्तदाता का परीक्षण किया जाता है और उसके पहले Treatment के बारे में भी कुछ सवाल पूछे जाते हैं। दाता के Hematocrit या हीमोग्लोबिन स्तर की जांच की जाती है। ताकि दाता को रक्त देने के बाद कोई बीमारी ना हो। गर्भवती महिलाओं को आमतौर पर रक्त देने से मना कर दिया जाता है।

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