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World Sleep Day: क्यो मनाया जाता है ‘वर्ल्ड स्लीप डे’ क्या है इसका इतिहास

इंसान के जिंदा रहने के लिए जितना सांस लेना जरूरी है उतना ही नींद भी जरूरी है। इस साल वर्ल्ड स्लीप डे (World Sleep Day) 19 मार्च को मनाया जा रहा है। इसकी तारीख बदलती रहती है।

नई दिल्ली: अगर आप स्वस्थ रहना चाहते है तो इसके लिए अच्छी नींद बहुत ही जरूरी है। आजकल लोग व्यस्त दिनचर्या और तनाव के कारण अच्छी तरह पूरी नींद नही ले पाते हैं। नींद पूरी नहीं होने पर मनुष्य किसी काम को ठीक से नहीं कर पाता है। अच्छी नींद का महत्व समझना और लोगों को जागरूक करने के लिए वर्ल्ड स्लीप डे (World Sleep Day) का आयोजन होता है।

इंसान के जिंदा रहने के लिए जितना सांस लेना जरूरी है उतना ही नींद भी जरूरी है।। इस साल वर्ल्ड स्लीप डे (World Sleep Day) 19 मार्च को मनाया जा रहा है। इसकी तारीख बदलती रहती है आपको बता दें, ‘वर्ल्ड स्लीप डे’ (World Sleep Day ) इसे पहली बार साल 2008 में मनाया गया था। इसके बाद से हर साल मार्च महीने में तीसरे शुक्रवार को ‘विश्व स्लीप डे’ मनाया जाता है। वर्ल्ड स्लीप डे मनाने का प्रमुख्य कारण है की लोगों को नींद और सेहत के बारे में समझाना है।

जानें क्या है इस साल के World Sleep Day का थीम

आजकल लोग भागदौड़ भरी ज़िंदगी में कम सोने लगे हैं। इससे उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके लिए डॉक्टर्स रोजाना कम से कम 8 घंटे सोने की सलाह देते हैं। इस साल ‘विश्व स्लीप डे’ का थीम ‘रेगुलर स्लीप और हेल्दी फयूचर’ (‘Regular Sleep, Healthy Future’) है।

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इसका मतलब ये है की लोग नियमित रूप से जरूरत की नींद ले सके जिस से वह एक स्वस्थ भविष्य कि कल्पना कर सकें। यदि हमारी नींद पूरी नहीं होगी तो हमारी कार्यक्षमता और स्वास्थ्य दिन-ब-दिन प्रभावित होगा। इसलिए सभी लोग नींद के प्रति लापरवाही न बरतते हुए इसको पूरा आठ घंटे का समय दें इसलिए इस थीम को चुना गया है।

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