World Suicide Prevention Day 2020: कोरोना काल में, भारतीय डिप्रेशन का सामना कर रहे हैं, देखिये सर्वे रिपोर्ट

आज #SuicidePreventionDay है.

हमें आत्महत्या के बारे में बात करने की जरूरत है.

हमें अपने दोस्तों, अपने परिवार, अपने सहकर्मियों के साथ इस बारे में बात करने की जरूरत है. हमें और अधिक बात करने की जरूरत है, हमेशा.

आत्महत्या रोकने की जरूरत है. हमें अपने आसपास के लोगों को शिक्षित करने की आवश्यकता है.

सर्वेक्षण के अनुसार, 59 प्रतिशत से अधिक आबादी चिंता से जूझ रही है, कि कोरोना काल में खुद को कैसे शांत रखा जाये.जिनमें से, 38 प्रतिशत लोगों में यह काफी अधिक है,और 9 प्रतिशत लोग कम समय के लिए डिप्रेस्ड महसूस करते हैं, वही 12 प्रतिशत आबादी रोज़ाना डिप्रेशन का शिकार होती है.

देखने में महामारी का कोई तत्काल अंत नहीं है, और जैसे-जैसे महीने बीतते जा रहे हैं, लोगों का मानसिक स्वास्थ्य काफी प्रभावित हो रहा है.शुरुआत में, अधिकांश लोगों के लिए, यह एक अलग सा अनुभव रहा है. नौकरियां खोने का डर, असफल अर्थव्यवस्था, बिगड़ते स्वास्थ्य,इन सभी चीजों ने लोगों की मानसिक हालत पर काफी दबाव डाला है.

अब, मानसिक स्वास्थ्य पर एक हालही के सर्वेक्षण में पाया गया है कि वर्तमान में 43 प्रतिशत भारतीय डिप्रेशन के शिकार हैं.

GOQII के अनुसार – एक स्मार्ट-टेक सक्षम निवारक हेल्थकेयर इकोसिस्टम है, जिसने 10,000+ भारतीयों का सर्वेक्षण को समझने के लिए आयोजित किया है कि कैसे COVID-19 ने जीवन शैली को बदल कर रख दिया है पिछले पांच महीने, कुछ लोगों के लिए बेहद कठिन रहे है,और देश के नागरिकों के स्वास्थ्य पर काफी प्रभाव डाला है. लॉकडाउन के साथ, चिंता, नौकरी खोने का डर, स्वास्थ्य ख़राब होने का डर सताता है,और अस्थिर वातावरण में, तनाव   उच्च स्तर पर पहुच चूका है.

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