मां दुर्गा की पूजा ऐसे और भी हो जाएगी फलदायी

मां दुर्गा की पूजा उपासना घर-घर में की जाती है। कहते हैं मां बहुत दयालू हैं और भक्‍तों पर कृपा करती हैं। इसीलिए तो मां के भक्‍तों का उनमें अपार विश्‍वास है। ऐसे में धर्म विशेषज्ञों का कहना है कि मां की पूजा के लिए अगर कुछ विधि-विधानों का ध्‍यान रखा जाए तो श्रेष्‍ठ रहेगा। ऐसे तरीके आजमाएं जा सकते हैं-

पूजन सामग्री-
दुर्गा पूजन से पहले यह सामग्री जुटा लें-
पंचमेवा, रोली, सिंदूर, कलावा, पंच​मिठाई, रूई, एक नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र, फूल, 5 सुपारी, लौंग,  5 पान के पत्ते, घी, चौकी, कलश, आम के पल्लव, समिधा, कमल गट्टे, कुशा, रक्त चंदन, श्रीखंड चंदन, जौ, ​तिल, प्र​तिमा, आभूषण व श्रृंगार का सामान, फूल माला।
पंचामृत बनाएं– दूध, दही, घी, शहद, शर्करा को एक में मिलाकर तैयार करें।

ऐसे करें पूजन
दुर्गा प्रतिमा के सामने आसनी पर बैठ जाएं। बिना आसन, चलते-फिरते और पैर फैलाकर पूजा नहीं करना चाहिए। इसके बाद अपने आपको तथा आसन को इस मंत्र से शुद्धि करें –
“ऊं अपवित्र : पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोऽपिवा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि :॥”
इन मंत्रों से अपने ऊपर तथा आसन पर 3-3 बार कुशा या पुष्पादि से छींटें लगाएं फिर आचमन करें –
ऊं केशवाय नम: ऊं नारायणाय नम:, ऊं माधवाय नम:, ऊं गो​विन्दाय नम:|

फिर हाथ धोएं, फिर आसन शुद्धि मंत्र बोलें –
ऊं पृथ्वी त्वयाधृता लोका देवि त्यवं विष्णुनाधृता।
त्वं च धारयमां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥

इसके पश्चात अनामिका उंगली से अपने मत्थे पर चंदन लगाते हुए यह मंत्र बोलें-
चन्दनस्य महत्पुण्यम् पवित्रं पापनाशनम्,
आपदां हरते नित्यम् लक्ष्मी तिष्ठतु सर्वदा।

संकल्प- हाथ में पुष्प, फल, सुपारी, पान, चांदी का सिक्का, नारियल (पानी वाला), मिठाई, मेवा, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर संकल्प मंत्र बोलें –
ऊं विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:, ऊं अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे, अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे पुण्य (अपने नगर/गांव का नाम लें) क्षेत्रे बौद्धावतारे वीर विक्रमादित्यनृपते(वर्तमान संवत), तमेऽब्दे क्रोधी नाम संवत्सरे उत्तरायणे (वर्तमान) ऋतो महामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे (वर्तमान) मासे (वर्तमान) पक्षे (वर्तमान) तिथौ (वर्तमान) वासरे (गोत्र का नाम लें) गोत्रोत्पन्नोऽहं अमुकनामा (अपना नाम लें) सकलपापक्षयपूर्वकं सर्वारिष्ट शांतिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया- श्रुतिस्मृत्योक्तफलप्राप्त्यर्थं मनेप्सित कार्य सिद्धयर्थं श्री दुर्गा पूजनं च अहं क​रिष्ये। तत्पूर्वागंत्वेन ​निर्विघ्नतापूर्वक कार्य ​सिद्धयर्थं यथा​मिलितोपचारे गणप​ति पूजनं क​रिष्ये।

इस मंत्र के साथ करें पूजा
माता दुर्गा की आराधना के समय ‘‘ऊँ दुं दुर्गायैनमः” मंत्र का जप करें।

नारियल का भोग लगाएं

माता दुर्गा की पूजा के दौरान नारियल का भोग जरूर लगाना चाहिए। मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने नारियल चढ़ाएं । कुछ देर बाद नारियल फोड़ दें। इसके बाद देवी को अर्पित कर भक्तों में बांट दें।

 

(इनपुट साभार हिन्‍दुस्‍तान)

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