Chaitra Navratri के सातवें दिन होगी मां कालरात्रि की आराधना, इन मंत्रों से करें विशेष पूजा

लखनऊ: पंचांग के अनुसार 19 अप्रैल को चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। आज सोमवार को मां दुर्गाजी की सातवीं शक्ति देवी कालरात्रि की पूजा चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के सातवें दिन होती है। मां कालरात्रि को यंत्र, मंत्र और तंत्र की देवी भी कहा जाता है। मां कालरात्रि की पूजा करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं। मां कालरात्रि की पूजा से शनिदेव भी शांत होते हैं।

पूजा का महत्व

चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के सातवें दिन यानी आज के दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से जीवन में आने वाले संकटों से मां रक्षा करती हैं। मां कालरात्रि शत्रु और राक्षसों का संहार करती हैं। आज के दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से तनाव, अज्ञात भय और बुरी शक्तिओं दूर होता है। मां कालरात्रि का रंग कृष्ण वर्ण है, इसलिए इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। मां कालरात्रि की 4 भुजाएं हैं। पौराणिक कथा के अनुसार असुरों के राजा रक्तबीज का संहार करने के लिए दुर्गा मां ने मां कालरात्रि का रूप लिया था।

पूजा विधि

आज के दिन सुबह स्नान करने के बाद पूजा आरंभ करनी चाहिए। मां कालरात्रि की पूजा में नियम और अनुशासन का विशेष पालन करना चाहिए। मां कालरात्रि की पूजा भी उसी प्रकार से होती है जिस प्रकार से अन्य देवियों की पूजा की जाती है। मां कालरात्रि की पूजा में मिष्ठान, पंच मेवा, पांच प्रकार के फल,अक्षत, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ नैवेद्य आदि का अर्पण किया जाता है। इस दिन गुड़ का विशेष महत्व बताया गया है, मां कालरात्रि को लाल रंग प्रिय है।

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मां कालरात्रि मंत्र:

– ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम: – ॐ कालरात्र्यै नम:

– ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ

– ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा।

मां कालरात्रि की आरती

कालरात्रि जय जय महाकाली

काल के मुंह से बचाने वाली

दुष्ट संहारिणी नाम तुम्हारा

महा चंडी तेरा अवतारा

पृथ्वी और आकाश पर सारा

महाकाली है तेरा पसारा

खंडा खप्पर रखने वाली

दुष्टों का लहू चखने वाली

कलकत्ता स्थान तुम्हारा

सब जगह देखूं तेरा नजारा

सभी देवता सब नर नारी

गावे स्तुति सभी तुम्हारी

रक्तदंता और अन्नपूर्णा

कृपा करे तो कोई भी दु:ख ना

ना कोई चिंता रहे ना बीमारी

ना कोई गम ना संकट भारी

उस पर कभी कष्ट ना आवे

महाकाली मां जिसे बचावे

तू भी ‘भक्त’ प्रेम से कह

कालरात्रि मां तेरी जय

 

 

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