कुश्ती के पितामह गुरु हनुमान (Guru Hanuman) की अनमोल धरोहर बदहाल

भारतीय कुश्ती के पिता गुरु हनुमान की अनमोल धरोहर अखाड़े में बदहाल पड़ी है, संग्रहालय बनाने की मांग

नई दिल्ली: भारतीय कुश्ती के पितामह गुरु हनुमान (Guru Hanuman) की अनमोल धरोहर गुरु हनुमान अखाड़े में बदहाल हालत में पड़ी हुई हैं। केंद्रीय खेल मंत्रालय तथा दिल्ली सरकार से लेकर कोई भी इनकी सुध लेने वाला नहीं है।

कुश्ती के सर्वश्रेष्ठ गुरु

गुरु हनुमान भारतीय कुश्ती में सर्वश्रेष्ठ गुरु माने जाते हैं। वह खुद द्रोणाचार्य और पद्मश्री थे लेकिन उन्होंने अनेक अर्जुन, द्रोणाचार्य और पद्मश्री पहलवान तैयार किए। पहलवानों को पढ़ाने और दांव पेंच सिखाने का उनका तरीका उन्हें महानतम बनाता है। उनके द्वारा संचालित गुरु हनुमान अखाड़ा कुश्ती प्रेमियों के लिए हमेशा से कुश्ती का देवालय और आदर्श विद्यालय रहा है जिसके दर्शन करके देश और दुनियाभर के कुश्ती प्रेमी खुद को धन्य मानते आए हैं।

 

लेकिन 1999 में गुरु हनुमान की मृत्यु के बाद उनके अखाड़े की हालत दयनीय हो गई है, जिसे लेकर उनके पूर्व शिष्य, कोच और कुश्ती प्रेमी बेहद आहत हैं और अखाड़े में उनकी अनमोल धरोहरों को संजोय रखने के लिए संग्रहालय बनाने की मांग कर रहे हैं। कुश्ती गुरु के रूप में गुरु हनुमान ने जैसा यश कमाया है, वैसा शायद ही कभी किसी भी खेल के गुरु को नसीब हुआ हो। अखाड़े की दीवारों पर टंगे फोटो, अखबारों की लंबी चौड़ी कटिंग, बड़े नेताओं और महान हस्तियों के साथ खींचे गए उनके फोटो गुरु हनुमान के ऊंचे कद का बखान करते हैं।

बदहाली की कहानी

पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह, डॉ शंकर दयाल शर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, योगी आदित्यनाथ, मार्गरेट अल्वा, बूटा सिंह, माधव राव सिंधिया, दारा सिंह और कई अन्य राजनेताओं के साथ उनके फोटो बताते हैं कि वह कितनी बड़ी शख्सियत थे और उन्हें कितना मान-सम्मान मिलता था। लेकिन गुरु हनुमान अखाड़े के एक कमरे में अस्त व्यस्त पड़े सैकड़ों मैडल, ट्राफियां, गदाएं और अन्य पुरस्कार गुरु हनुमान की अनमोल धरोहर की बदहाली की कहानी बयां करते हैं। गुरु हनुमान अखाड़े के संचालक और कोच की भूमिका निभाने वाले द्रोणाचार्य अवार्डी महासिंह राव के अनुसार 1999 में गुरु हनुमान के देहावसान के बाद अखाड़े में पुरस्कारों और सम्मानों की देखरेख पहले जैसी नहीं रही। कारण खर्चे बढ़ गए हैं और सरकारी तौर पर कोई मदद नहीं मिलती है। हालांकि गुरु हनुमान अपने जीते जी अखाड़े को संग्रहालय बनाने की इच्छा जाहिर कर चुके थे पर किसी कारणवश ऐसा संभव नहीं हो पाया। अब तो इन अनमोल धरोहरों की हालत और खराब ही होती जा रही है।

राष्ट्रीय धरोहर जैसा सम्मान

गुरु हनुमान ट्रस्ट के प्रमुख महाबली सतपाल, द्रोणाचार्य राज सिंह, महासिंह राव, जगमिंदर, अर्जुन अवार्डी सुजीत मान,राजीव तोमर, और अन्य पहलवान तथा कोच मानते हैं कि अखाड़े में संग्रहालय की स्थापना ही गुरु हनुमान को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उनका मानना है कि गुरु हनुमान बिड़ला व्यायामशाला को राष्ट्रीय धरोहर जैसा सम्मान मिलना चाहिए। महा सिंह राव चाहते हैं कि दिल्ली और देश की सरकारें गुरु हनुमान के योगदान को देखते हुए ठोस कदम उठाएं। वह विश्वस्तरीय हस्ती थे और देश विदेश से भारतीय कुश्ती की जानकारी हासिल करने वाले कुश्ती प्रेमी सबसे पहले गुरु हनुमान के अखाड़े को याद करते हैं, लेकिन वहां पहुंच कर उन्हें अस्त व्यस्त पड़े बहुमूल्य सम्मानों और पुरस्कारों के दर्शन होते हैं। यदि उन्हें सजा संवार कर रखा जाए तो भारतीय कुश्ती के भीष्म पितामह द्रोणाचार्य गुरु हनुमान की आत्मा को शांति जरूर मिलेगी।

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