पवार के बयान पर भड़के यदियुरप्पा, बोले ‘सीमा विवाद से जनता को भड़काना बन्द करें’

अजीत पवार बाला साहेब की बरसी पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे और उस वक्त लोगों को संबोधित करते हुए उन्होनें कहा कि बाला साहेब ठाकरे का सपना था कि बेलगाम, करवार और निपाणी एक साथ एक जुट होकर महाराष्ट्र राज्य की स्थापना करे।

कर्नाटक: महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच पुराना सीमा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के बयान के बाद इस विवाद ने एक बार फिर से रफ्तार पकड़ ली है।

उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने बेलगाम, करवार और निपानी इलाके जो कि मराठी भाषा से ताल्लूक रखते हैं और महारष्ट्र और कर्नाटक राज्यों की सीमा से सटे हैं, पर बयान देकर इस मामले को फिर से ताजा कर दिया है।

कर्नाटक सीमावर्ती क्षेत्र को महाराष्ट्र में लेना बाला साहेब ठाकरे का सपना

अजीत पवार बाला साहेब की बरसी पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे और उस वक्त लोगों को संबोधित करते हुए उन्होनें कहा कि बाला साहेब ठाकरे का सपना था कि बेलगाम, करवार और निपाणी एक साथ एक जुट होकर महाराष्ट्र राज्य की स्थापना करे।

अजीत पवार ने बताया कि शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे का इन तीनों इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल करना सपना था और हमें बाला साहेब ठाकरे का सपना एक साथ मिलकर पूरा करने का संकल्प लेना चाहिए।

महाजन समिती की रिपोर्ट ही फाइनल है

अजीत पवार के बयान के तुरन्त बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा ने अजीत पवार के बयान की निंदा करते हुए कहा कि अजीत पवार को इस तरह का बयान नही देना चाहिए इस तरह का बयान देना गलत है।

येदियुरप्पा ने बताया कि महाजन समिती की रिपोर्ट फाइनल है जिसमें इन तीनों जगहों को कर्नाटक राज्य में होने की बात कही गई है। इस मुद्दे पर इस तरह बयान देकर लोगों को भड़काना गलत है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के बयान के बाद कर्नाटक में विपक्ष में बैठे नेता सिद्धारमैया ने शिवसेना को फटकार लगाते हुए अंग्रेजी और कन्नड़ में लगातार दो ट्वीट किए।

महाराष्ट्र मुख्यमंत्री कर्नाटक की जनता को भड़का रहे : पवार

सिद्धारमैया ने अपने ट्वीट में कहा कि यह विवाद एक लंबे समय से चला और रहा है। शिवसेना इस समय इस मुद्दे को उठाकर कर्नाटक के लोगों को भड़काने का काम ना करे। सिद्धारमैया ने अपने में टवीट में यह भी बताया कि कर्नाटक ने अपने मराठी भाषी सीमावर्तीयों के लिए कई अलग अलग योजनाएं भी चलाई हैं।

1947 से ही चल रहा कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद

कर्नाटक और महाराष्ट्र सीमा विवाद 1947 से ही चला आ रहा है। 1947 से पहले ये दोनो राज्य आलह नहीथे तब यह बॉम्बे प्रेसीडेन्सी और मैसूर स्टेट हुआ करते थे।

आजादी के बाद भाषा के आधार पर राज्यों का बटंवारा किया गया। बंलगाम में मराठी भाषा बोलने वालों की संख्या कन्नड बोलने वालों की संख्या से ज्यादा थी। 1948 में महाराष्ट्र नगरीय निकाय ने बेलगाम को महाराष्ट्र में शामिल करने का प्रस्ताव दिया जिसका केरल और महाराष्ट्र सरकार ने विरोध किया।

उस समय केन्द्र सरकार ने इस प्रस्ताव को बिना तर्क वाली और एकपक्षीय बताते हुए रद्द कर दिया था। इन क्षेत्रों को एकपक्षीय राज्य में ही रहने दिया गया।

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