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मुख्तार अंसारी को लेकर योगी आदित्यनाथ और कैप्टन अमरिंदर सिंह आमने–सामने

लखनऊ: मुख्तार अंसारी को लेकर पंजाब व उत्तर प्रदेश की सरकारों के बीच चल रही गर्मा गर्मी व सियासत नें पंजाब की कांग्रेस सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों सरकारें अपने अपने तर्क के जरिए मुख्तार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में उलझी हुई हैं। अचानक से अपराधी से बहुबली नेता बने मुख्तार अंसारी में समस्त जनता की रुची बढ़ती जा रही है की आखिर जीत भाजपा सरकार की होगी या कांग्रेस की।

मुख्तार अंसारी को सौंपने के मामले मे सियासत का खेल

फिलहाल मुख्तार पंजाब की रोपड़ जेल में बंद हैं। वह यूपी के मऊ से 5 बार विधायक रह चुके हैं । यूपी की भाजपा सरकार मुख्तार को यूपी भेजने के लिए सुप्रीम कोर्ट के साथ में है। मुख्तार का साथ देने की अमरिंदर की खास वजह , दादा रह चुके हैं कांग्रेस अध्यक्ष, नाना सेना में थे बिग्रेडियर।

पंजाब सरकार स्वास्थ्य का बहाना देते हुए उसे यूपी न भेजने का हवाला दे रही है। दोनों ही सरकारों के बीच बीते कुछ दिनों से लगातार तना तनी का माहौल बना हुआ है । 2019 में मुख्तार मोहाली के बिजनेसमैन को धमकी देने के मामले में पंजाब की जेल में बंद हैं। 2 साल पहले इसी मामले की जांच के लिए पंजाब पुलिस यूपी के बांदा जेल से पंजाब लेकर आई थी।

विरासत में मिली मुख्तार अंसारी को राजनीती

मुख्तार के दादा मुख्तार अहमद अंसारी 1 वर्ष तक कांग्रेस के प्रेसिडेंट रहे। मुख्तार के नाना ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान अंसारी स्वतंत्रता सेनानी थे और साल 1947 में शहीद हो गए थे जिसके बाद उन्हे मरणोपरान्त महावीर चक्र से भी सम्मानित किया गया था। मुख्तार अंसारी के रिश्ते के चाचा हामिद अंसारी देश के उपराष्ट्रपति और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति भी रह चुके हैं।

1988 में पहली बार मुख्तार का आया था नाम

1988 में एक पुलिस कांस्टेबल की हत्या के बाद मुख्तार का नाम पहली बार सामने आया था । यह हत्या किसी मामूली पुलिसवाले की नहीं बल्कि उस दौर में पूर्वांचल में एक माफिया त्रिभूवन सिंह के भाई राजेंद्र सिंह की थी। त्रिभूवन सिंह के भाई की दिनदहाड़े हत्या में नाम आने के बाद मुख्तार का अपराध का सिलसिला जो एक बार बढ़ा तो फिर वो लगातार आगे की ओर बढ़ता ही गया । देखते ही देखते तीन राज्यों के 10 जिलों के 21 थानों में अलग अलग मुख्तार के खिलाफ 46 मामले दर्ज किए गए ।

बृजेश सिंह से दुश्मनी के बाद चमका मुख्तार का नाम

अच्छे दोस्त माने जाने वाले बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी के बीच बगावत की शुरूआत 1990 में तब शुरू हुई जब मुख्तार ने बृजेश सिंह के सरकारी ठेकों को हथिया लिया । वहीं 1991 में वाराणसी से विधायक रहे अजय राय के भाई अवधेश राय की हत्या के बाद से दोनों गैंग के बीच जंग छिड चुकी थीं।

पूर्वांचल की बादशाहत हुई हासिल

विधायक मुख्तार अंसारी के काफिले पर हुए हमले में उनके गनर समेत एक हमलावर की मौत हो गयी। इस हमले के दौरान घायल हुए बृजेश सिंह की गोली लगने से मौत हो गयी। इस घटना के बाद पूर्वांचल के एक इलाके में मुख्तार का पूरी तरह से कब्जा हो गया। हालांकि पूर्वांचल के दूसरे छोर में अभी भी माफियाओं के बादशाह कहे जाने वाले हरिशंकर तिवारी का बोल बाला था। जिनके संबंध मुख्तार से काफी अच्छे बताए जाते थे।

बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या से दहशत मे आया यूपी

नवंबर 2005 को मुहम्मदाबाद से बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की एक क्रिकेट टुर्नामेंट का उद्धाटन करने के बाद लौटते समय हत्या कर दी गयी। इस हमले के लिए एक ऐसी जगह को चुना गया जहां से गाड़ी लेकर भागना असम्भव था और आस पास कोई भी रास्ता नहीं था। इस दौरान विधायक की टाटा सफारी पर चारों तरफ से घेरकर 500 से अधिक राउंड फायर किए गए। हमले में बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की मौका-ए-वारदात पर ही मौत हो गयी। पोस्टमार्टम के दौरान विधायक के शरीर से 21 गोलियां निकाली गयीं थीं। इस हत्याकांड में मुख्तार अंसारी, उनके भाई अफजाल अंसारी समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था।

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2009 में जेल से लड़ चुका है चुनाव

साल 2009 में जेल में रहते हुए बीजेपी के जाने माने नेता मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ वाराणसी से लोकसभा का चुनाव लड़ा। हालांकि मुख्तार इस चुनाव में हार गया लेकिन उसे मुरली मनोहर जोशी की तुलना में ज्यादा प्रतिशत वोट मिले थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के नेता मनोज सिन्हा को मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी ने भारी वोटों से करारी शिकस्त दी।

छह करोड़ में ब्रजेश सिंह ने दी मुख्तार की सुपारी

मुख्तार अंसारी और ब्रजेश सिंह के बीच बढ़ती दुश्मनी इतनी बढ़ चुकी थी कि मुख्तार की हत्या करने के लिए ब्रजेश ने आरोपी लंबू शर्मा को मुख्तार की हत्या के लिए छह करोड़ की सुपारी दे दी। इसका खुलासा तब हुआ जब दिल्ली मे लंबू शर्मा गिरफ्तार किया गया । बता दें कि लंबू बम से हमला करके किसी की भी जान लेने के लिए पहचाना जाता था।

आखिर क्यों मुख्तार अंसारी को बचा रही है पंजाब की सरकार

मुख्तार अंसारी यूपी में योगी सरकार के आने के बाद से ही अपनी बेल कैंसल करवाकर पंजाब की मोहाली जेल में बंद है। मुख्तार पर एक बिजनेसमैन को धमकी देने का आरोप है। मुख्तार अंसारी को वापस लाने के लिए यूपी के अलग अलग जिलों की पुलिस कई बार वारंट लेकर पंजाब आई लेकिन जेल प्रशासन और पंजाब सरकार ने मुख्तार के खराब स्वास्थ्य का बहाना देते हुए उसे यूपी सरकार को सौंपने से मना कर दिया। लेकिन इस मामले को लेकर अभी भी यूपी और पंजाब की सरकार में टकरार बनी हुई है।लोगों का ये भी मानना यह भी है कि पंजाब की सत्ता में से कुछ नामी लोगों से भी मुख्तार के संबंध अच्छे हैं।

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