UP में शराब की तय कीमत से ज्यादा वसूला तो योगी सरकार लेगी एक्शन

लॉकडाउन 3.0 के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने शराब की बिक्री को लेकर बड़ा फैसला किया है. 4 मई से राज्य में शराब की बिक्री की शुरू हो गई है. लॉकडाउन के दौरान ग्रीन और ऑरेंज जोन में शराब की बिक्री पर छूट दी गई है. हालांकि हॉटस्पॉट या कंटेनमेंट जोन में शराब की बिक्री पर पाबंदी रहेगी. वहीं होटल और रेस्टोरेंट के बार में भी फिलहाल शराब नहीं बेची जा सकेगी.

आबकारी आयुक्त ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश भर में कहीं भी शराब की तय कीमत से अधिक दाम लिए जाने पर कार्रवाई की जाएगी. सभी लाइसेंस धारकों को निर्धारित मूल्य पर ही शराब बेचनी होगी. साथ ही आबकारी अधिकारियों को टेस्ट परचेजिंग करने के लिए भी कहा है.

यूपी सरकार ने शराब की बिक्री के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की है. सरकार ने बताया कि आबकारी विभाग की मात्र एकल दुकानों को ही सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक शराब की बिक्री की अनुमति है. वहीं सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए शराब बिक्री के निर्देश दिए गए हैं. एक दुकान पर एक वक्त में सिर्फ 5 लोग ही शराब खरीद सकते हैं.

कैसे होती है राज्यों की कमाई

राज्यों की कमाई के मुख्य स्रोत हैं- राज्य जीएसटी, भू-राजस्व, पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट या सेल्स टैक्स, शराब पर लगने वाला एक्साइज और गाड़ियों आदि पर लगने वाले कई अन्य टैक्स. शराब पर लगने वाला एक्साइज टैक्स यानी आबकारी शुल्क राज्यों के राजस्व में एक बड़ा योगदान करता है.

शराब और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी से बाहर रखा गया है. इसलिए राज्य इन पर भारी टैक्स लगाकर अपना राजस्व बढ़ाते हैं. हाल में राजस्थान सरकार ने शराब पर एक्साइज टैक्स 10 फीसदी बढ़ा दिया. राज्य में अब देश में निर्मित विदेशी शराब (IMFL) पर टैक्स 35 से 45 फीसदी तक हो गया है.

इसी तरह बीयर पर भी टैक्स बढ़ाकर 45 फीसदी कर दिया गया है. यानी 100 रुपये की बीयर में 45 रुपया तो ग्राहक सरकार को टैक्स ही दे देता है. ज्यादातर राज्यों के कुल राजस्व का 15 से 30 फीसदी हिस्सा शराब से आता है. शराब की बिक्री से यूपी के कुल टैक्स राजस्व का करीब 20 फीसदी हिस्सा मिलता है.

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