योगी सरकार के फैसले पर टूटा विरोधियों का कहर, बताया- हिंदुत्व तुष्टिकरण

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मुजफ्फरनगर और शामली दंगे से जुड़े केस वापस लेने के फैसले ने राजनीतिक गलियारों की हलचल काफी तेज कर दी है। दरअसल, योगी सरकार के इस फैसले ने उन्हें विरोधियों के निशाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। इस फैसले के खिलाफ कई राजनीतिक दिग्गजों ने मोर्चा संभाल लिया है, विरोधियों ने योगी सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले को वोट बैंक की राजनीति करार दिया है।

इसी क्रम में एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने योगी सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये हिन्दुत्व तुष्टिकरण है। उन आरोपियों में कई बीजेपी के सांसद और एमएलए भी थे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट बनाए जाने की बात कही लेकिन ये लोग स्पेशल कोर्ट बनने से पहले इन लोगों को बचाना चाहते हैं। दूसरी बात यह है कि बीजेपी हमेशा मुस्लिम तुष्टीकरण की बात करती है। ये हिंदुत्व तुष्टिकरण है।

ओवैसी ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश में रूल ऑफ़ लॉ नहीं, रूल ऑफ़ रिलीजन है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार उन तमाम लोगों को बचाना चाहती है, जिनकी वजह से 50 हज़ार लोग बेघर हो गए। ओवैसी ने कहा कि एक बात साफ हो गई है कि ये ट्रिपल तलाक़ पर बिल लाते हैं और अब रेप के आरोपी को बचाने की बात कर रहे हैं। ये मुसलमानों के हितैषी नहीं हैं।

वहीं सपा के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव ने कहा कि योगी सरकार ने दंगा पीड़ितों के लिए कुछ नहीं किया। योगी सरकार केस वापसी सिर्फ वोट बैंक साधने के लिए कर रही है।  कांग्रेस नेता पी एल पुनिया ने कहा कि मुजफ्फरनगर के दंगों में शामिल लोगों को योगी सरकार के एक साल पूरे होने का गिफ्ट मिला है, जो सरकार केस को वापस ले रही है। लेकिन हमें अदालत पर भरोसा है। हम अपना विरोध जारी रखेंगे।

उधर जेडीयू नेता केसी त्यागी ने केस वापसी पर उन्होंने कहा कि जो मामले अदालत में विचाराधीन है उनको वापस लेना ठीक नहीं है। केस वापसी पर एनसीपी नेता माजिद मेमन ने कहा कि राज्य को अधिकार है स्टेट हारमनी में केस वापस ले ले। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि राजनैतिक हथियार के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जाए।

आपको बता दें कि साल 2013 में यूपी के मुजफ्फरनगर और शामली में भीषण दंगे हुए थे। उस वक्त प्रदेश में मौजूदा अखिलेश सरकार ने इससे जुड़े सभी 131 लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन पर मुकदमे दर्ज कराए थे। वर्तमान समय की योगी सरकार ने इन मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरु कर दी है। इनमे 13 हत्या के मामले व 11 हत्या की कोशिश के केस शामिल हैं। मुजफ्फर नगर में करीब 500 से अधिक लोगों पर दंगा भड़काने के आरोप लगे थे।

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