योगी ने किया सबसे बड़ा ऐलान, अब वो खुद पूरा करेंगे मोदी का ये सबसे बड़ा वादा

लखनऊ। हाल ही में सीएम योगी ने कहा था कि वह बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए एक मजबूत योजना बना चुके हैं। जिसकी वजह से अब उन्हें नौकरी के लिए दर दर भटकना नहीं पड़ेगा। ऐसे में मालूम होता है कि अति पिछडे़ और अति दलितों को कोटे में कोटा देकर सपा−बसपा गठबंधन की हवा निकाली जा सके। अब देखना यह है कि आने वाले चुुनाव में बीजेपी के ग्राफ का लेवल किस हद तक बढ़ता है।

वहीं हाल ही में हुए उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद बीजेपी अपने घुटने टेकती नज़र आ रही है। देखा जाए तो साल 2014 में मिली कामयाबी के बाद इस बार बीजेपी की रणनीति पर सवाल उठते नज़र आ रहे हैं। जिसके बाद यह कहा जा रहा है कि इस बार बीजेपी का 2014 जैसा प्रदर्शन कर पाना संभव नहीं है। विपक्ष की एकता को देखते हुए कहीं न कहीं भाजपा को भी अब इस बात का एहसास होने लगा कि उनकी नाव डूब रही है। इसीलिए सूत्रों के मुताबिक कहा जा रहा है बीजेपी अब बचने के लिए प्लान में बड़ा बदलाव करने जा रही है।

देश की जनता को अब यह एहसास होने लगा है कि नरेंद्र मोदी की करनी और कथनी में बहुत अंतर है। इसी कारण मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ गिरने लगा है और हाल ही में उपचुनाव में आए नतीजे इस बात की ओर स्पष्ट इशारा करते हैं। नरेंद्र मोदी का जादू काफूर बन के उड़ता देख भाजपा के खेमे में जबरदस्त बेचैनी और घबराहट है। अपने चल रहे खराब दिनों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी का मानना है कि शायद ही अब कभी 80 में से 71 सीटों वाला इतिहास दोहरा पाएगा। इसीलिए अब अपनी क्षमता अनुसार उसने अपनी सीटों का स्तर गिराकर 50 कर दिया है।

पार्टी के मुताबिक अगर इतनी सीटें भी बीजेपी को मिल जाती है तो उनके लिए यह बड़ी बात होगी, क्योंकि यूपी में किसी भी पार्टी को 10-15 सीटों से ज्यादा नहीं मिलेगी। ऐसे में अगर बीजेपी की सीटे कम होती है तो वह उसे दक्षिण और नॉर्थ ईस्ट को मिलाकर पूरा कर लेगी।

साथ ही बीजेपी इस बार आगामी 2019 के चुनाव के लिए अपने कोर वोटरों पर ज्यादा फोकस करने का प्लान बना रही है। पार्टी कमज़ोर न पड़े इसलिए इस बार खुद पीएम मोदी 2019 के चुनाव में एक चेहरा बनकर उतरेंगे, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि लोगों को पीएम पर ज्यादा भरोेसा है। अब भाजपा पूर्वी उत्तरप्रदेश में निषाद, कुर्मी और पश्चिम में जाट वोटरों को साधने का प्लान बना रही है। इसके साथ ही अपर कास्ट के वोट को वह सभी पर प्राथमिकता देगी।भाजपा को लगता है कि वह कैराना में वोटों का अंतर पाट सकती है।

2014 में उसे 5,65,909 वोट मिले थे। इस बार के उपचुनाव में उसे 4,36,564 वोट मिले। वहीं विपक्ष की बात करें तो उसे 5,32,201 वोट मिले थे। (इसमें सपा, बसपा और आरएलडी के वोट शामिल हैं कांग्रेस के नहीं) वहीं इस उपचुनाव में उसे 4,81,182 वोट मिले। कैराना में भले उसका वोट शेयर गिर गया हो, लेकिन वह अपने दम पर भी 46.5 फीसदी वोट पा गई।

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