क्या आप को पता है हर सिक्के में छिपा है एक संदेश

coin2आगरा। सिक्कों को इकट्ठा करना कई लोगों का शौक हो सकता है लेकिन उनकी पूरी जानकारी हासिल करना और उनके ऊपर किताब लिखना अपने आप में बड़ी बात है लेकिन ये कारनामा करने जा रही हैं मुम्बई निवासी ज्योति राजन। ज्योति भारत में जारी किये गये सिक्कों को न सिर्फ जुटा रही हैं बल्कि उनकी जानकारी समेटते हुए एक किताब भी लिख रही है जो बच्चों को सिक्कों की जानकारी देने का काम करेगी। वे मंगलवार को दयालबाग डीम्ड विवि मे चल रहे शीत कालीन प्रशिक्षण शिविर मे छात्रों को प्रशिक्षित करने आयी थीं।

इंडिया मे दो तरह की करेंसी चलती है एक पेपर और दूसरी कॉइन करेंसीष इनमें से सिक्कों वाली करेंसी खास तौर पर लोगों के आकर्षण का केंद्र होती है क्योंकि इन सिक्कों को भारत सरकार खास मौकों को और खास बनाने के लिए जारी करती है..लिहाजा इन सिक्कों को कलेक्ट करना कई लोगों को पसंद होता है..लेकिन हम आज आपको एक ऐसी शख्सियत से मिलाते हैं जो कि न सिर्फ सिक्कों का संग्रह करती है बल्कि वे उनकी सारी जानकारी को जुटाती है और अब जब वे अपने इस शौक को काफी आगे तक ला चुकी हैं तो वे इसे किताब का रूप देने की तैयारी कर रही हैं।

coin3ज्योति राजन जो कि जेएनयू से एकॉनोमिक्स हिस्ट्री की पढ़ाई करने के बाद अब मुम्बई मे रह रही हैं और फाउंडेशन फॉर पीस एंड़ डवलपमेंट नामक एनजीओ की रीसर्च डायरेक्टर भी हैं। ज्योति राजन के पास भारत से जारी हुए सिक्कों का विशाल संग्रह है..जो कि उन्होंने तमाम जरियों से जुटाये और अब उनका संग्रह कर उनकी जानकारियों को न सिर्फ जुटा रही हैं बल्कि उन्हे दूसरों के साथ साझा भी करती हैं।
सिक्कों का संग्रह करने वाली ज्योति इन दिनों आगरा मे चल रहे दयालबाग डीम्ड यूनिवर्सिटी के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य मे आयोजित हो रहे शीत काली प्रशिक्षण शिविर मे बच्चों को सिक्कों की जानकारी देने के लिए आयी हुई हैं।

उन्होने बताया कि सिक्के दो तरह के होते हैं। पहले कॉमेमोरोटिव करेंसी और दूसरी डेफीनेटिव करेंसी। इन दोनों ही तरह के सिक्कों को देश की विरासतों के साथ प्रमुख बातों, योजनाओं, लोगों के साथ जानकारियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए जारी किया जाता है।
coin4कमेमोरोटिव करेंसी की बात की जाये तो 1970 के दशक मे देश के विकास की योजनाओं की जानकारी देने वाले सिक्कों को जारी किया गया तो वहीं 1980 के दशक मे फूड एंव कल्चर को बढ़ावा देने वाले सिक्कों को। इसके बाद 1982 मे भारत मे हुए नौवें एशियन गेम को समर्पित सिक्के को जारी किया गया।

1990 मे महापुरूषों के नाम समर्पित सिक्के जारी किये गये। 2000 में धार्मिक मान्यताओं के आधार पर सिक्कों को जारी किया गया। 2009 मे साइंस को समर्पित होमी जहांगीर भाभा पर सिक्का जारी किया गया। 2011 में इंडियन कॉउन्सिल मेडिकल रिसर्च को समर्पित सिक्का जारी किया गया। इसी तरह तंजाबूर के वृहदीश्वर मंदिर के एक हजार साल पूरे होने के उपलक्ष्य मे एक हजार रूपये का सिक्का जारी किया है।

coin5ज्योति राजन के पास जो सिक्कों का संग्रह है,उसमें आजादी से पहले के ईस्ट इंडिया कम्पनी और ब्रिटिश काल मे चलने वाले सिक्कों से लेकर अब तक के सिक्के मौजूद हैं।

आजादी से लेकर 1950 तक बिटिश कालीन सिक्के ही चलन में रहे जबकि 1950 में सात तरह के सिक्के जारी किये गये जो कि एक आना, आधा आना, दो आना, एक पैसा. आधा रूपया और चार आना का था। इसके बाद एक रूपये का सिक्का भी इसी साल जारी किया गया।

पहले और अब के सिक्कों की बात की जाये तो पहले के सिक्कों मे ज्यादा धातु का प्रयोग होता था जबकि अब के हालात ये है कि स्टील का प्रयोग सिक्के बनाने में होता है जिनको संग्रहकर्ता बिल्कुल पसंद नही करते। पहले की बात की जाये तो एक रूपये का पहला सिक्का 11.88 ग्राम का था जो अब घटते-घटते 3.8 ग्राम तक आ गया है। इसके सिक्कों के स्तर को काफी नुकसान पहुंचा है।
coin6कुल मिलाकर कहा जाये तो ज्योति राजन की ये रिसर्च वाकई बेहद लाभकारी है क्योंकि सिक्कों को लेकर उन्होंने ये संदेश दिया है कि हर सिक्का कुछ न कुछ संदेश देता है और थोडा सा ध्यान देने पर उन्हें आसानी से समझा भी जा सकता है।

लिहाजा आज के बाद यकीकन जिस सिक्के को आप महज करेंसी समझ कर अपनी जेब मे रख लेते थे। अब उम्मीद है कि उसे पटल कर एकबार उसके पीछे छपे संदेश को आप भी एक बार देखकर समझना जरूर चाहेंगे क्योकि हमने भी ये करने की कोशिश की है।

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